Wednesday, July 21, 2010

भूख से किसान आत्महत्याए कर रहे हैं ...









देश मैं महेगाई आसमान छू रही हैं ...हजारों लोग भारत मैं भूखे सो रहे हैं .गरीबों को दो वक्त कि रोटी हासिल नही हो पा रही हैं ...हजारों लोग भूखे पेट सो रहे हैं ..भूख से किसान आत्महत्याए कर रहे हैं ...दूसरी तरफ हजारों टन अनाज देश कि मंडियों मैं सड़ रहा हैं ...ऐसी ही देश कि राजधानी दिल्ली कि नरेला अनाज मंडी हैं जहा हजारों टन खाद्यान बारिस मैं भीग कर सड़ रहा हैं ..यहा तक कि इस मंडी कि अनाज कि बोरियों मैं अंकुर फुट आये ...इस अनाज से पोधे बन गये ..पर जिम्मेदारी लेने को कोई तेयार नही ....
ये हैं देश कि जानी मानी अनाज मंडी नरेला ...यहा का हाल आप खुद देखिये केसे अनाज सड़ रहा हैं ...ये सड़ता अनाज सरकार को दीखाई नही देता ..आखिर सड़ते अनाज को ..खत्म होते खाद्यान को बचाना किसकी जिम्मेदारी हैं ..?? इस पर सरकार चुप हैं ....देश मैं महेगाई आसमान छू रही हैं ...हजारों लोग भारत मैं भूखे सो रहे हैं .गरीबों को दो वक्त कि रोटी हासिल नही हो पा रही हैं ...हजारों लोग भूखे पेट सो रहे हैं ..भूख से किसान आत्महत्याए कर रहे हैं पर यहा ये अनाज सड़ रहा हैं ...सरकार का कोई ध्यान नही ..यहा इस मंडी मैं हरियाणा व उत्तरप्रदेश से भी काफी मात्रा मैं अनाज आता हैं ...किसान अपना अनाज यहा आडतियों को बेचकर चले जाते हैं लेकिन आडति लोग इस पूरे अनाज को सुरक्षित नही रख पाते हाल आपके सामने हैं ..इस मैंडी मैं अनाज के लिए सेड कि कमी हैं ..सेड कम होने कि वजह से हजारों टन अनाज खुले मैं ही डालना पडता हैं ...सरकार ने सेड नही बनाये पर व्यापारी लोगों ने भी तिरपाल का इंतजाम नही किया ..और हजारो टन अनाज बर्बाद हो गया ...किसान अनाज लेकर आते हैं अचानक बारिस शरू हो जाती हैं किसानों कि पूरे साल कि कमाई मेहनत यहा खत्म हो जाती हैं किसानों कि शिकायत हैं कि यहा शेड नही ..सुविधा नही ...मार्केटिंग फीस तो ली जाती हैं पर सुविधा नही दी जाती ...- व्यापार मंडल का उत्तर भी चोकाने वाला हैं ..ये कहते हैं केवल चार पाच हजार बोरिया ही बाहर खुले मैं हैं ...सुनिए इनका लहजा ये ऐसे कह रहे हैं मानों चार पाच हाजार बोरी खाराब होना सामान्य सी बात हो ..दुसरा इनका कहना हैं कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा मैं तिरपाल हैं ..लेकिन खुद ये भी मान रहे हैं कि इनके पास १५० तिरपाल हैं क्या मात्र १५० तिरपाल इतने अनाज को दक पायेगे ....ये कहते हैं कि व्यापारी अनाज रोके नही क्योकि जगह कम हैं लेकिन ये अब भी शेड मांग नही कर रहे हैं बल्कि किसानों व व्यापारियों पर आरोप लगाये जा रहे हैं ... - अब कोई भी जिम्मेदारी लेने को तेयार नही किसी किसान का अनाज खराब हो तो इन्हें कोई चिंता नही ....

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