Tuesday, September 16, 2014

निजी स्कूल की बस ने गली में खेल रहे चार साल के बच्चे को कुचला ..

निजी स्कूल की बस ने गली में खेल रहे चार साल के बच्चे को कुचला ..
अनिल अत्री दिल्ली .............
एंकर -




बाहरी दिल्ली के कंझावला थाना इलाके में निजी स्कूल की बस ने गली में खेल रहे चार साल के बच्चे को कुचला ..बच्चे की मौके पर मौत .. गुस्साए लोगो ने बस में की तोड़फोड़ .. बस को कब्जे में लेकर पुलिस जांच में जुटी ...................
वी ओ 1
ये है बाहरी दिल्ली के कंझावला थाना एरिया  का मीर विहार .. यहा हीरालाल पब्लिक स्कूल रानी खेड़ा की इस बस ने गली में खेल रहे चार साल के अजाज को कुचल दिया .. मासूम अजाज की मौके पर ही मौत हो गई ..बस अचानक गली में आई और बच्चे को बिना देखे ड्राईवर ने कुचल दिया .बच्चा बस के नीचले पहिये से कुचला गया और मौके पर ही मौत हो गई .. लोगो का आरोप है की बस की गति तेज थी इस कारण हादसा हुआ और गुस्साए लोगो ने स्कूल बस को तोड़ डाला ...
बाईट - मोहम्मद खादिम मृतक बच्चे के पिताजी ..
वी ओ 2
अब बच्चे का परिवार गम है ..अब इस तरह के हादसों से साफ है राजधानी में मासूम बच्चे बिलकुल सेफ नहीं है ..कल थाना स्वरूप नगर इलाके में एक शख्स ने बच्चे को सड़क पर पटका जो जिन्दगी व् मौत के बीच जूझ रहा है और आज एक मासूम को इस बस ड्राईवर ने कुचल दिया और जान ले ली ..अब ये भी जांच का विषय है की बस का ड्राईवर कौन था .. बस का ड्राईवर आदि स्टाफ रूल रेगुलेशन के मुताबिक़ थे या नहीं . अब बस को कब्जे में लेकर कंझावला थाना पुलिस मामले की जांच कर  रही है ...................

अनिल अत्री दिल्ली .............

E-रिक्सा चालको की याचिकाकर्ता से याचना ..................

E-रिक्सा चालको की याचिकाकर्ता से याचना ..................
एंकर - राजधानी दिल्ली में E-रिक्सा को नियमित करने के लिए मसौदा तैयार हो गया है और अगले दस दिन में अधिसूचना जारी होने की सम्भावना .. अब अगले दस दिन में E-रिक्सा फिर से शुरू होने की आशाये बढ़ी .. E-रिक्सा चालको  में ख़ुशी की लहर जरुर पर नहीं हो पा रहा है विश्वास .. जिनके E रिक्सा घर खड़े उन लोगो ने अब राहत की साँस ली ..E-रिक्सा का कहना का सभी कानून सरकार एक बार में ही बना ले ताकि बार बार इनके रिक्सा बंद न हो और हम सब कानून मानने की तैयार ... साथ ही E-रिक्सा के खिलाफ याचिकार्ता से भी E-रिक्सा चालको ने हाथ जोडकर प्रार्थना की है की वो सरकार से मिलकर अपनी आपत्तिया दूर करवा ले और उपरी अदालत या किसी दूसरी पिटीशन के जरिए इनकी रिक्सा बंद न करवाए क्योकि इससे हजारो गरीबो का चुल्हा बुझ जाता है ...............
वी ओ 1
दिल्ली में E-रिक्सा कोर्ट के आदेश के बाद बंद है .. हजारो गरीब ऐसे है जिन्होंने लोंन  लेकर तो किसी ने ब्याज पर पैसे लेकर E-रिक्सा खरीदी और उससे अपना परिवार पालना शुरू किया .. लेकिन E-रिक्सा से कई हादसे हुए .. मनमाने ढंग से E-रिक्सा सड़को पर चलने लगे .. नाबालिग बच्चे E-रिक्सा चलाने लगे .. ये साइकिल होने के कारण सड़को पर कोई चालान नहीं ..कोई नियम का पालन नहीं .. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने E-रिक्सा पर बैन लगाते हुए कहा की सरकार कोई नियमावली बनाये इन्हें मोटर व्हीकल एक्ट के अंदर शामिल करे तभी चलाए तब तक E-रिक्सा पर पर पूरी तरह बैन लगा दिया .. इससे हजारो लोग बेरोजगार हो गये ... और तभी से सरकार कोर्ट में जल्दी ही E-रिक्सा के लिए मोटर व्हीकल एक्ट लाने की बात कह चुकी है और अब अगले दस दिन में ये सरकार एक नियमावली बनाकर अधिसुचना लाएगी जिसके जरिए ये E-रिक्सा फिर से चल सकेगे .. इस बार से E-रिक्सा चालक काफी खुश है की अगले दस दिन में इनके E-रिक्सा चलने की संभावनाए काफी बढ़ गई है ..पर इन लोगो का कहना है की E-रिक्सा चलने पर ही इन्हें पूरा विशावस होगा क्योकि आश्वासन पहले भी मिल चुके है ये पोलिटिकल आश्वासन पर पूरी तरह विश्वास नहीं कर रहे है .. 
बाईट - E-रिक्सा चालक
बाईट - E-रिक्सा चालक
वी ओ 2
अब E-रिक्सा चालको का कहना है की सरकार नियम भी एक साथ बनाये बार बार इनके E-रिक्सा बंद न हो जितने नियम बनाने है वे सब अभी एक साथ बना ले ये लोग सब नियम मानने को तैयार है पर बार बार इनके E-रिक्सा बंद न हो ... साथ ही E-रिक्सा के खिलाफ याचिकाकर्ता से भी E-रिक्सा चालको ने याचना की है की वो अपनी आपत्तिया भी सरकार से मिलकर इस नियमावली में शामिल कर ले और बाद में कोई दूसरी याचिका या उपरी अदलात में न जाए ताकि हम गरीबो के E-रिक्सा चलते रहे ....
बाईट - E-रिक्सा चालक
बाईट - E-रिक्सा चालक
वी ओ 3
अब E-रिक्सा चालको में एक आश जरुर जगी है वो पूरी होगी या याचिकाकर्ता किसी उपरी अदलात में जाएगा या यही अलाद्त अनुमति देगी या नहीं देगी ये आने वाला वक्त तय  करेगा .........

अनिल अत्री दिल्ली .............





Saturday, September 13, 2014

दिल्ली नगर निगम के मेटरनिटी होम में पिछले छे महीनो से नहीं हुई एक भी डिलीवरी






बाहरी दिल्ली के बख्तावरपुर में बने  दिल्ली नगर निगम के मेटरनिटी होम में पिछले छे महीनो से नहीं हुई एक भी डिलीवरी ..दर्जनों गावो के लिए बना है ये मेटरनिटी होम .... आलिशान बिल्डिंग में बने इस मेटरनिटी होम में करीब आध दर्जन स्टाफ हर महीने ले रहा है लाखो  की सेलरी .. पिछले छे महीने से डिलीवरी के इस होम में लेडी डॉ ही नहीं है .. बाकी चपरासी , नर्स , वार्ड बॉय जैसे स्टाफ पर हो रहे है लाखो खर्च .. बिल्डिंग के उपरी दो मंजिल पर छे महीने से सफाई तक न होने से कई कई इंच रेत व् मलबा चढ़ा ..ग्रामीणों ने विरोध किया तो उत्तरी दिल्ली नगर निगम की हेल्थ कमिटी के चेयरमेन गुलाब सिंह राठौर ने दौरा किया तो वे भी ये सब देख हैरान थे और चेयरमेंन ने कहा सफाई कर्मियों पर होगी निश्चित रू से कारवाई और पानी आदि की भी सुविधा का भी अभाव माना .. और ग्रामीणों को जल्दी सुधार के साथ साथ जिम्मेदार लोगो के खिलाफ कारवाई का दिया आश्वाशन  ... मेटरनिटी होम की उपरी मंजिल पर बिल्ली  , सांप , चंमगादड़, कबूतरों की भरमार ... पानी की टंकिया खाली ... यहा सुविधा न होने से यहा के दर्जनों गावो के लोगो को बीस किलोमीटर दूर बाड़ा हिंदूराव या रोहिणी के बाबा साहेब अम्बेडकर अस्पताल में पड़ता है जाना .........
वी ओ 1
ये है बाहरी दिल्ली के बख्तावरपुर में बना दिल्ली नगर निगम का मेटरनिटी होम .. यहा आसपास के दर्जनों गावो की सुविधा के लिए ये मेटरनिटी होम बनाया गया था ताकि गावो के महिलाओं को डिलीवरी के लिए ज्यादा दूर न भागना पड़े .. पर इसके हालात कई सालो से बदतर है .. तीन मंजिला आलीशान बिल्डिंग बनी है जिसमे एक अस्पताल तक चलाया जा सकता है .. पर या डिलीवरी का रिकोर्ड देखकर आप हैरान हो जायेगे ...यहा एक साल में मात्र तीन महिलाओं की डिलीवरी हुई ..और पिछले छे महीने में तो एक भी डिलीवरी नहीं ...छे महीने से मेटरनिटी होम में महिला डॉ ही नहीं है .. छे महीने पहले महिला डॉ की ट्रांसफर हुई तो दूसरी महिला डॉ आई ही नहीं नहीं .. और मेटरनिटी होम में बाकी कर्मचारियों की लाखो की सेलरी हर महीने से निगम से आ रही है और काम का रिजल्ट जीरो है ...
बाईट - सुमित चौहान स्थानीय निवासी  पहचान लाल टी शर्ट ..
वी ओ 2
स्टाफ ही नहीं यहा जो स्टाफ है वो भी जिम्मेदारी नहीं निभा रहा .. बिल्डिंग के निचे के पोर्शन को छोडकर उपरी मंजिलो पर करीब छे महीने से सफाई ही नहीं की गई .. ये देखिये पक्षियों का मलबा .. कूड़े के ढेर .. गंदगी ..इससे साफ दिखाई  दे रहा है की ये सब एक दिन का नही बल्कि महीनों से जमा है ये सब .. टॉयलेट के हालात देखिये .. ये देखिये वाशवेसन को डस्टबीन बनाया है ..पानी की टंकिया खाली है ... ओपरेशन थियेटर का सालो से यूज नहीं हुआ है .. मेटरनिटी होम में ये नया सामान आया तो काम नहीं तो जरूरत भी नही नया सामान सालो से इस स्टोर में पड़ा है और उसके खुले हिस्से पर हवा लगने से देखिये जंग लगना शुरू हो गया ..  उपर दीवारों से पलस्तर झड रहा है ...बिजली की तारे खुली है ... साप बिल्ली कबूतर जैसे पक्षियों और जानवरों ने इसे अपना घर बना लिया ....
बाईट -जोगिद्र मान  स्थानीय निवासी पहचान- सफेद कुर्ता पायजामा ..
बाईट -पवन स्थानीय निवासी

वी ओ 3
इसकी शिकायत उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हेल्थ कमिटी के चेयरमेन गुलाब सिंह राठौर को भी की गई ..वे खुद दौरे पर आये तो सब देखकर हैरान थे ..चेयरमेंन साहब दो बजे मेटरनिटी होम में पहुंचे तो मोर्निग का स्टाफ जिसकी डयूटी दो बजे तक थी वे मेटरनिटी होम से जा चुके थे और नया इवनिंग का स्टाफ मिला .. गंदगी मिली ..बिजली की तारे खुली मिली .. चमगादड़ , बिल्ली कबूतर मिले पर मरीज एक भी नहीं डॉ भी नही ..पता किया तो चेयरमेन साहब को बताया गया की पिछले छे महीने से एक भी मरीज नहीं आया .. मरीज आये भी कैसे मेटरनिटी होम में पिछले छे महीने से लेडी डॉ ही नहीं ... और उससे पहले की भी दर देखिये एक साल में मात्र तीन डिलीवरी .. ये आंकड़ा सबको हैरान करने वाला है ... चेयरएमेंन साहब ने खुद देखिये पूरे हालात देखे ... बंद टॉयलेट देखे ..गंदगी देखि और कहा की सफाई के लिए जिम्मेदार शख्स पर निश्चित रूप से कारवाई होगी ..बाकी कामो में सुधार होगा ..
बाईट - गुलाब सिंह राठौर ( चेयरमेन हेल्थ कमेटी उत्तरी दिल्ली नगर निगम )
वी ओ 4
अब यहा सुधार के लिए आश्वासन मिला है देखने वाली बात होगी की इस पर कब तक अम्ल होगा .. बाकी यदि ये मेटरनिटी होम सुचारू रूप से चला तो आसपास के दर्जनों गावो को और दर्जनों कालोनियों के लाखो लोगो को फायदा होगा और उन्हें दूर दराज के अस्पतालों में नहीं भागना पड़ेगा और अंदर के अस्पतालों पर भी भार नहीं बढ़ेगा ........................
अनिल अत्री दिल्ली .............


Thursday, September 11, 2014

छात्र ने सिगरेट लाने से मना कर दिया तो चाकूयों से गोद कर उसकी हत्या ..

.छात्र ने सिगरेट लाने से मना कर दिया तो चाकूयों से गोद कर उसकी हत्या कर दी गई...दिल दहलाने वाली ये घटना देश की राजधानी दिल्ली की है ...जहाँ डांस क्लास के बाद घर लौट रहे छात्रो को रास्ते में शराब पी रहे कुछ बदमाशो ने सिगरेट लाने को कहा जिसे वो और उसके साथियो ने मना कर दी , तो बदमाशो ने एक को डंडे से मार सिर फोड़ दिया दूसरे को चाकूओ से गोद हत्या कर दी । 2 आरोपी गिरफ्तार हैबाकी दो फऱार है ... पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है मामला भारत नगर थाने ईलाके की है ।
वीओ  1
रोती बिलखती इस माँ को कोन दिलाशा दे ---कुछ शराबियों ने इसके 14 साल के बच्चे को केवल इसलिए चाकुओं से गोदकर मार किया की उसने उन्हें बहार से सिगरेट लाकर नहीं दी --घटना वज़ीर पर जे जे कॉलोनी की है --कल रात नवीं क्लास का छात्र रंजन अपने दोस्त के साथ पार्क में डांस क्लास लेने के बाद घूम रहा था --उसी वक्त पार्क में कई लडके बैठकर पार्क में शराब पी रहे थे --उन्होंने रंजन और उसके दोस्त को बुलाकर बहार से सिगरेट लाकर देने को कहा --उन्होने इंकार किया तो वे उन्हें मरने दौड़े --यह देख रंजन और उसका दोस्त भागने लगे --लेकिन उन शराबी युवकों की तादाद ज्यादा थी --उन्होंने उन्हें पार्क के बाउंड्री के बहार पकड़ लिया और डंडे और चाकुओं से हमला कर दिया --रंजन को भी दो चाक़ू मारे --उसे घायल हालत में अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां उसके मौत हो गयी --सभी आरोपी आस पास के ही रहने वाले है --
बाईट --विजय ( चश्मदीद व पीड़ित )
(हम पार्क में घूम रहे थे -ये लोग शराब पी रहे थे उन्होंने हमें सिगरेट लाने को कहा --हमे मना कर दिया तो मरा --रंजन को चाकुओं से मारा )
वी-ओ-2
रंजन के घरवालों का रो रोकर बुरा हाल है --किसी को यकीन नहीं हो रहा है की इतनी छोटी से बात पर कोई इस छोटे बच्चे की ह्त्या तक कर सकता है --रंजन के माता पिता को इसकी खबर आस पास के ही कुछ लडको ने दी --वे उसे पास के सुंदर लाल जैन अस्पताल ले गयी लेकिन वहां  इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी --
बाईट ---शिवजी और चन्द्र कला ( रंजन के माता पिता )टेक्स्ट -  शिवाजी में दस बजे आया ..देखा मेरी बीवी भागी जा रही है .दो चाकू मारे ..मेन बन्दा पकड़ा नहीं गया ..
माँ - टेक्स्ट -
वी-ओ-3
हैरानी यह नहीं है की केवल सिगरेट न लाकर देने पर कुछ शराबियों ने रंजन को इतनी बेरहमी से मारा --- बल्कि सवाल यह भी है की इस तरह पार्क में सरेआम शराबी शराब पी रहे है लेकिन उन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है ---न पुलिस का खौफ  है और न पार्क में इन्हे शाराब पीने से कोई रोकने वाला --बहरहाल भारत नगर थाना पुलिस ने इस मामले में दो लोगों गिरफ्तार कर लिया है तो दो की तलाश है --


अनिल अत्री  दिल्ली ...

दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी तो होगा बड़ा आन्दोलन .ये कहना है आम आदमी पार्टी का

दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी तो होगा बड़ा आन्दोलन .ये कहना है आम आदमी पार्टी का .शीला दीक्षित ने भाजपा के पक्ष में ब्यान क्या दिया दिल्ली की राजनीति में हलचल मच गई .. बुराड़ी से आप विधायक संजीव झा ने कहा की ये हास्यपद है हम तो पहले ही कह रहे थे की ये दोनों पार्टिया मिली हुई है ... . अब शीला दीक्षित ने बोल तो दिया पर आकंडा कहा से आयेगा .. शीला दीक्षित सीनियर नेता है वो ऐसे नहीं बोलती कुछ होगा तभी बोला है इसी कारण भाजपा कह रही है की वो न्योता मिलने पर वे सरकार बनाएगी .. संजीव झा ने कहा की इन दोनों ने प्रजातंत्र को धोखा दिया है .. इस तरह चोर दरवाजे से सरकार नहीं बनने देंगे .. यदि चोर दरवाजे से सरकार बनी तो हम घर घर जायेगे ..और बड़ा आन्दोलन होगा ..
बाईट - सजीव झा आप विधायक
वी ओ फाइनल - अब खुद 49 दिन में दिल्ली से भागने वाली सरकार दुसरो के सरकार बनाने पर बड़े आन्दोलन की बात कह रही है शायद इस पार्टी को आन्दोलन में ही आनन्द आता है क्योकि खुद की सरकार में भी इसकी पार्टी के सीएम साहब भी धरने बैठ गये थे ... अब यदि भाजपा सरकार बनाएगी तो आम आदमी पार्टी छटपटायेगी और आन्दोलन करेगी तो कोई हैरानी नहीं होगी ..................

अनिल अत्री दिल्ली .....................

Tuesday, September 9, 2014

यमुना बनेगी दिल्ली की शान ... यमुना के विकास पर केंद्र सरकार खर्च करेगी दो हजार करोड़ .

यमुना बनेगी दिल्ली की शान ... यमुना के विकास पर केंद्र सरकार खर्च करेगी  दो हजार करोड़ .... नरेला पल्ला से नॉएडा तक बनेगे तीन बैराज .. ड्राफ्ट तैयार करने में लगी केंद्र सरकार .. केन्द्रीय मंत्री नितिन गटकरी ने दावा किया छे महीने में करेगे काम शुरू और दिल्ली को मिलेगा पूरा पानी ... DDA ..दिल्ली गवर्मेंट ..निगम की बुलाई मीटिंग ..
वी ओ 1
ये देखिये यमुना की हालत .. कितना काला गंदा पानी आकर यमुना में गिर रहा है .. जगह है वजीराबाद ..यहा पर दो बड़े नाले आकर यमुना में गिर रहे है और और पहले से गन्दला पानी और ज्यादा गन्दला हो रहा है .. दुसरे दिल्ली में पीने के पानी की किल्लत है ..और ये किल्लत लगातार चलती आ रही है .. हरियाणा से पानी को लेकर विवाद जारी है और कोई स्थाई समाधान इस समस्या के लिए नहीं किया गया .. अब केंद्र सरकार इस पर गंभीर हुई है और इस समस्या का स्थाई समाधान  की कोशिश में है .केन्द्रीय मंत्री नितिन गटकरी ने दावा किया है की वे यमुना को दिल्ली की शान बनायेगे और  नरेला पल्ला से नॉएडा तक तीन बैराज बनाये जायेगे . जहा पानी रोककर पूरी दिल्ली को पानी दिया जायेगा ...   ड्राफ्ट तैयार करने में लगी केंद्र सरकार ..  ..उसके बाद दिल्ली को मिलेगा पूरा पीने का पानी ... वजीराबाद में बैराज तैयार किया जाएगा और दुगुना पानी जमा होगा .. इस योजना को शुरू करने में अब वक्त नहीं लगेगा केवल  छे महीने में करेगे काम शुरू.....
बाईट - केन्द्रीय मंत्री नितिन गटकरी

वी ओ 2
यमुना को लेकर सरकार ही नहीं सामाजिक संठन भी हमेशा आवाज उठाते रहे है और पिछली सरकार में यमुना एके नाम पर करोड़ो रूपये खर्च हुए पर यमुना की हालत नहीं सुधरी सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया अब लोगो को मोदी सरकार से कुछ आशा बंधी है ..  सामाजिक कार्यकर्ता भी केन्द्रीय मंत्री नितिन गटकरी की योजना बैराज बनाकर पानी रोककर फिर दिल्ली में सप्लाई करने के ड्राफ्ट को सही ठहरा रहे है और ये सामाजिक कार्यकर्ता अपने सुझाव भी दे रहे है जिससे ये योजनाए और भी कारगार साबीत हो ..समाजिक कार्यर्क्ताओ का मानना है की तीन महीने छोडिये यदि तीन साल में भी हो जाए तो बड़ी कामयाबी होगी .....
बाईट -   हरपाल राणा समाजिक कार्यकर्ता
वी ओ 3
अब लोगो को मोदी सरकार से कुछ आशा है और केन्द्रीय मंत्री नितिन गटकरी  भी दावा कर रहे है की छे महीने के अंदर ये काम शुरू होगा .. यदि सही में ये योजना पूरी हुई तो दिल्ली के लोगो की एक पीने के पानी की बड़ी समस्या का समाधान होगा .

अनिल अत्री दिल्ली ...............


अनिल अत्री  दिल्ली ...
ANIL ATTRI DELHI ......

Monday, September 8, 2014

दिल्ली में पिछले तीन दिन से हो रही बारीस में बाहरी दिल्ली के नरेला की अनाज मण्डी में हजारो टन अनाज भीग रहा है

दिल्ली में पिछले तीन दिन से हो रही बारीस में बाहरी दिल्ली के नरेला की अनाज मण्डी में हजारो टन अनाज भीग रहा है ...ये एशिया की जानी अनाज मण्डी होने के कारण ऑफ सीजन में भी हजारो टन अनाज के ढेर लगे थे जो मण्डी में शैड न होने के कारण भीग रहे है और अनाज खराब हो रहा है .. बारीस में भीगकर अनाज काफी मात्रा में खराब हो जाता है ..... यहाँ अनाज कुछ किसानो तो कुछ बीच के व्यापारियों का है .. जब बारीस आती है तो तब  अनाज के ढेर अचानक कहा लेकर जाए  मंडी में शेड नही है .. शेड न होने से अनाज खराब होता है .... ..सरकार ने दिल्ली में यह अनाज मंडी तो बना दी लेकिन अनाज को रखने की सुरक्षित व्यवस्था नहीं कर पा रही है...यहाँ हर साल हजारो टन अनाज  बारिश में भीग जाता है लेकिन सरकार शैड बनाना तो दूर तिरपाल तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है.. आजकल मंडी में धान की फसल खराब हो रही है ...

वी ओ 1
देश में कुछ लोग भूख से मर रहे है ...उनके पास रोटी भी नसीब नही ..पर दूसरी तरफ यहा देखिये नरेला अनाज मंडी ...यहा खुले में हजारो टन अनाज पड़ा है और जब भी बारीस आती है तो ये अनाज भीग जाता है ...आजकल सीजन ऑफ है पर इस मण्डी में आजकल भी धान की फसल के ढेर लगे है .. ये देखिये कैसे खुले ढेर व् बोरियो के ढेर लगे है .. मण्डी में हजारो टन अनाज इसी तरह फैला हुआ है और खराब हो रहा है .. बोरिया खीग गई ..ज्यादा भीगने पर इस अनाज में अंकुर तक पैदा हो जायेगे .. अब अनाज खराब भी हुआ और किसान व् व्यापारियों को दाम भी काफी कम मिलेगे और इन्हें भारी घाटा उठाना पड़ेगा ..........
बाईट - धीरज आढती
वी ओ 2
 अनाज मंडी के लिहाज से ये मंडी एशिया की जानी मानी मंडी है .और यहा दिल्ली के अलावा  हरियाणा , उत्तर प्रदेश व राजस्थान से भी किसान फसल लेकर आते है और यहा की बदहाली से सब किसान परेशान है जबकि यहा इस मंडी से करोड़ो का टेक्स सरकार को मिलता है पर बदले में ये बदहाली ...मजदुर भी यहा बदहाली में है ..
बाईट - रामपाल  किसान
वी ओ 3
इस मंडी में अनाज बर्बाद होने का मामला एव पहला नहि है इससे पहले भी हर वर्ष यह ऐसी तरह हजारो क्विंटल  अनाज खराब होता है और मामले को मीडिया सरकार को भी हर साल परिचित करवाती है पर सरकार इंतजाम कुछ नहीं करती ...लगता है इस बार भी मिडिया ये अनाज की बदहाली दिखायेगी पर सरकार कुछ नहीं करेगी और अगली बारीस में फिर अनाज खराब होगा और लगता है ये लगातार चलता रहेगा .. ..

अनिल अत्री  दिल्ली ..

दिल्ली में महिलाओं के लिए जरूरी हुआ दुपहिया पर हेल्मेंट पहनना

दिल्ली में महिलाओं के लिए जरूरी हुआ दुपहिया पर हेल्मेंट पहनना ..पर महिलाये नही कर रही है नियम का पालन ..आज दिल्ली में कई जगह पुलिस ने किये चालान .कुछ महिलाये हेल्मेंट खरीदती नजर जरुर आई .. महिलाओं ने गिनाये अलग अलग बहाने .किसी ने सिर दर्द तो ..किसी ने सिख महिला होने का दावा किया ..
वी ओ 1
ये है दिल्ली का मॉडल टाउन इलाका .. यहाँ बाइक चलाने वाली व बाइक पर सवार होने वाली बिना हेल्मेंट की महिलाओं के चालान किये जा रहे है .. ऐसे ही चालान किग्ज वे कैम्प पर किये गये .. काफी तादाद में महिलाये बिना हेल्मेंट के दुपहिया पर सवारी करती मिली ... महिलाये कोई सिख महिला तो कुछ बहाना करती नजर आई .... कुछ महिलाये हेल्मेंट खरीदते हुए भी मिली ...
बाईट - बाइक सवार महिला
बाईट - बाइक सवार महिला
बाईट - बाइक सवार महिला
वी ओ 2
रोड़ पर सेफ्टी के लिए हेल्मेंट का पहनना जरुरी है ... जब दुर्घटना होती है तो उस वक्त कोई लिंग , धर्म विशेष आदि का बहाना नहीं चलेगा और बिना हेल्मेंट के सिर फटने मौत होने की संभवना कई गुना ज्यादा होगी .. अब लोगो को भी समझना होगा की हेल्मेंट चालान से बचने के लिए नहीं बल्कि खुद की सेफ्टी के लिए जरुरी है ..

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अनिल अत्री  दिल्ली ...

दिल्ली में नाबालिग़ लडकी ने दिखाई बहादुरी ..

दिल्ली में नाबालिग़ लडकी ने दिखाई बहादुरी .. अपने पिता को किडनेपर से बचाया ..बल्कि आसपास के लोगो के पहुंचने पर तीन किडनेपर को कराया अरेस्ट भी ... मामला बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी का .. शनीवार रात छे से सात किडनेपर ने के ब्लाक में एक घर से शख्स को किडनेप किया और शख्स के बेटी ने देखा तो विरोध किया न विरोध किया बल्कि सात किडनेपर के बीच अपने पिताजी का हाथ पकड़ लिया ..लडकी किडनेपरस संघर्ष करने लगी ..साथ में सहायता के लिए चिल्लाई भी और तभी आसपास के लोग जागकर आये साथ में वही से गुजर रहा कोंस्टेबल भी आया तो कुछ किडनेपर भाग गये पर तीन किडनेपर को उनकी जाईलो गाडी समेत पकडकर पुलिस के हवाले किया ...लडकी की बहादुरी ने अपने पिताजी की जान बचा ली ..................
वी ओ 1
ये लडकी है 16 साल की सर्वेश ..सर्वेश के पिताजी राम सिंह मंगोलपुरी में रहते है और रेहड़ी पटरी लगाकर अपने घर को चला रहे थे ..शनीवार रात एक जाईलो कार से कुछ लोग आये वक्त भी रात के करीब साढ़े बारह बजे .. और राम सिंह को जबरन उठाकर किडनेप करके ले जाने लगे और तभी रामसिंह की 16 साल की बेटी सर्वेश जागी और किडनेपर का विरोध किया ..सर्वेश चिल्लाते हुए अपने पिताजी का हाथ पकडकर छुडवाने लगी .. इसी बीच किडनेपर ने लडकी को भी कार में डाल लिया ..तभी शोर होने पर आसपडोस के लोग व वही से गुजर रहा पुलिस कर्मी भी भागकर आये तो किडनेपर को भागना पड़ा पर तीन किडनेपर को पब्लिक ने पकड़ लिया और किडनेपर की जाईलो गाडी में लोगो ने पकड़ ली और सभी को पुलिस के हवाले किया ....
बाईट -  रामसिंह
बाईट - सर्वेश
वी ओ 2
अब लडकी की बहादुरी ने इसके पिताजी को बचा लिया वरना इस अपरहण के बाद रामसिंह का शायद ज़िंदा बच पाना मुश्किल था .. तीनो आरोपियों से अब रिमांड पर लेकर बाकी आरोपियों की तलास है .. दिल्ली पुलिस अब इनका पुरानी रंजिस का मामला बता रही है और उसी नजरिये से जांच कर रही है .........................................

दिल्ली में भी हो सकती है क्लोरीन गैस की बड़ी त्रासदी ..

दिल्ली में भी हो सकती है क्लोरीन गैस की बड़ी त्रासदी .. भोपाल गैस त्रासदी की तरह राजधानी में भी लोग हो सकते है क्लोरीन गैस के शिकार .. बाहरी दिल्ली के झंगोला में दिल्ली जल बोर्ड के रेनिवैल प्लांट में क्लोरीन गैस हुई लिकिज । खेतो में बने प्लांट का आसपास करीब सौ एकड़ फसल पेड़ पौधे तक मुरझाये । लोगो ने खेतो से भागकर बचाई जान । कुछ लोग बेहोश भी हुए । यदि गाव की तरफ गैस जाती तो पूरा गाव होता खाली । यमुना की तरफ खेतो में हुआ रिसाव ..लोगो जल बोर्ड के इस रैनीवैल पर हंगामा । अधिकारियों को बनाया बंधक ..  फसल मुआवजे व् लापरवाह कर्मचारी के खिलाफ कारवाई की मांग ।
वी ओ 1 जल बोर्ड के रैनिवैल प्लांट पर खड़े ये लोग है बाहरी दिल्ली के कंझावला के किसान .. इन्होने गेट बंद कर दिया और अंदर है जल बोर्ड के कर्मचारी व् अधिकारी ... ये गाव यमुना किनारे बसा है और यमुना किनारे रैनिवैल प्लांट लगाकर कई सौ गावो को पानी सप्लाई किया जाता है .. यहा पानी सप्लाई के लिए क्लोरीन गैस के बड़े बड़े ये सिलेंडर लगाये जाते है .. और अचानक ये सिलेंडर लिकिज हो गया .. और इस सिलेंडर से कलोरीन गैस निकली ..गैस इतनी जहरीली की आसपास यमुना किनारे कई सौ एकड़ जमीन में लगी फसल व् सब्जी जलकर मुरझा गई ...पेड़ो व पौधों के पत्ते तक मुरझा गये .. लोगो को आवाज देकर बताया गया की क्लोरीन लिकिज हो गई सभी लोग खेतो से भागे .. लोगो को गैस से सिर चक्कराने लगे तो लोग खेतो से भागे और खेत खाली हो गये .. कुछ लोग बेहोश तक हो गए जिन्हें ट्रेक्टर से लोग तुरंत गाव में उठा ले गये जिन्हें काफी देर में होश आया .. हवा पश्चिम दिशा से थे और पश्चिम में बसा झंगोला गाव बचा गया और पूर्व की तरफ यमुना किनारे की और गैस गई और सैकड़ो एकड़ फसल मुरझा गई ..पेडो के पत्ते मुरझा गये ..सब्जिया बर्बाद हो गई . साथ ही अब ये सब्जिया जहरीली हो गई खाने वालो को हो सकता है बड़ा नुकशान .. यदि हवा पूर्व की दिशा से होती तो पूरा गाव खाली करना पड़ता .. इतनी बड़ी घटना के बाद भी घंटो तक जल बोर्ड के अधिकारी नहीं आये ..इस कारण लोग गुस्से में हो गये ..
बाईट - सतीश कुमार स्थानीय निवासी टेक्स्ट - वाटर सप्लाई ये पानी में यूज करते है ..हमारी फसल में नुकशाना हुआ है ..उसका मुआवजा दे ..वरना हम मर जायेगे ..कोई भी ऑफिसर नहीं आया ..
बाईट - जोनी स्थानीय निवासी टेक्स्ट - सौ से ढेढ़ सौ एकड़ में नुकशान है ..चार पांच बेहोश हुए ट्रेक्टर में लेकर गये ..शुक्र है की हवा यमुना की तरफ की थी वरना आधा गाव तबाह होता ..

वी ओ 2
जल्दी से लीकेज बंद न करने व लापरवाही से लिकिएज होने के कारण स्थनीय लोगो ने इस रैनिवैल प्लांट के गेट को बंद कर जल बोर्ड के कर्मचारियों को अंदर रोक दिया है और बड़े अधिकारियों के आने की मांग कर रहे है .. लोगो को मांग है की लापरवाही कर्मचारी पर कारवाई हो साथ ही उनकी फसलो का मुआवजा मिले ..
बाईट -संजय चौहान  स्थानीय निवासी टेक्स्ट - ढाई सौ तिन सौ किलो में नुकशाना ..आज हमारी भरपाई कौन करेगा ..इस प्लांट को कही अलग जगह बनाया जाए ..
बाईट  - सतविन्द्र सिंह स्थानीय निवासी टेक्स्ट - हम यहा आये लिकिज हो रही थी ..हमारी पूरी फसल तबाह हो गई ..हमने अधिकारी बंद कर रखे है ..हमारी फसल का क्लेम मिले ..जब तक बड़े अधिकारी नहीं आते ..

वी ओ 3
अब जल बोर्ड के कर्मचारी इसे एक दुर्घटना मान रहे है और कह रहे है उसे वजीराबाद से टीम बुलाकर अस्थाई रूप से बंद कर दिया है .. नुकशान तो है ..मान रहे है पत्तिया मुरझा गई है .. साथ ही कह रहे है हम क्या कर सकते है घर में सिलेंडर लिकिज हो जाए तो क्या कर सकते है ...
बाईट - दिल्ली जल बोर्ड जेई text -

नुकशान तो है ..मान रहे है पत्तिया मुरझा गई है .. साथ ही कह रहे है हम क्या कर सकते है घर में सिलेंडर लिकिज हो जाए तो क्या कर सकते है ...वी ओ 4
अब जरूरत है एसी खतरनाक गैस का प्लांट गाव से दूर हो साथ ही ऐसे इंतजाम हो की गैस लीक हो तो तुरंत उस पर काबू पाए जा सके ..और लीक हो भी जाए तो उसके इन्तजाम ऐसे हो की बड़ी तबाही न हो .... अब यहा किसानो को फसल का बड़ा नुकशान हुआ है और सरकार की तरफ से कोई मुआवजे आदि की घोषणा नहीं की गई है ...



अनिल अत्री  दिल्ली ...

Monday, July 28, 2014

गाव सीखो का .. गाव की 99% पापुलेशन भी सीख धर्म की ..पर गाव के स्कूल में न पंजाबी भाषा न ही गुरुद्वारों में सिखाई जाती गुरुमुखी .

सीखो के गाव के बच्चो को माँ बोली गुरुमुखी पढनी लिखनी तक नहीं आती .. स्कूल में पंजाबी भाषा का सब्जेक्ट व टीचर नहीं और गुरुद्वारे में भी पंजाबी नहीं सिखाई जाती .. ..सरकार के साथ साथ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी व्  पंजाबी एकेडमी से भी कर रहे है अरदास .. हमें सिखाओ गुरुमुखी ...
एंकर -
वी ओ 1
 ये है दिल्ली का झंगोला गाव .. झंगोला गाव 1950 से बसा है और झंगोला गाव उन दो गावो में एक है जो पूरे गाव सरदार परिवारों के है .. पूरा गाव सरकार कम्युनिटी का है .. पर विकास कार्यो से अछूता रहा है .. गाव में अधिकतर लोग कम पढ़े लिखे है और यमुना किनारे खेती करते है ..इसलिए पांच हजार से ज्यादा आबादी के गाव में मात्र प्राइमरी तक का स्कूल है ... पन्द्रह साल पहले गाव के स्कूल में पंजाबी एकेडमी की तरफ से एक पंजाबी टीचर था जो बच्चो को माँ बोली गुरुमुखी लिखना पढना सिखाता था .. पर पन्द्रह साल पहले एकेडमी के वे टीचर गए तो पिछले पन्द्रह साल से यहा गाव में पंजाबी सिखाने के लिए कोई टीचर नहीं ..न ही स्कूल में कोई ऐसा सब्जेक्ट ... गाव पंजाबियों का स्कूल में करीब 90 प्रतिशत बच्चे पंजाबी फिर भी स्कूल में पंजाबी भाषा नहीं .. न ही पंजाबी का टीचर ... अब बच्चे पंजाबी भाषा बोलना तो परिवार में सिख गये पर माँ बोली गुरुमुखी को लिखना व् पढना इनके बच्चो को नहीं आता .. इनके बच्चे जब अपने सगे सबंधियो के गाव जाते है या पढकर बाहर पंजाबी कम्युनिटी में व्यापार व् नौकरी करने जाते है तो पंजाबी ने पढ़ व् लिख पाने से बेइज्जत मह्सुश करते है ... गाव के स्कूल में पंजाबी भाषा न होने का इन्हें काफी गम है ..

बाईट - कर्म सिंह ( स्थानीय निवासी  पहचान ..गुलाबी  पगड़ी में )
बाईट -   स्थानीय निवासी ( नीली पगड़ी में ..)
वी ओ 2
ऐसा नहीं की गाव के लोगो ने यहा पंजाबी भाषा की मांग न की लोगो ने वक्त वक्त पर मांग की है ... शिक्षा मन्त्रियो से भी मिले है पर इनको सिर्फ आश्वासन मिला पंजाबी भाषा का सब्जेक्ट या टीचर नहीं ... गाव देहात  के गरीब लोग दूर दराज के स्कूलों में जा नहीं सकते यही सरकारी स्कूल में पढना पड़ता है और स्कूल में पंजाबी भाषा न होने से ये लोग पंजावी भाषा लिखने पढने से वंचित रह जाते है ..गाव में ऐसा भी माहौल नहीं की गाव के गुरुद्वारे में ग्रन्थि साहब गुरुमुखी सिखाये ..यहाँ गुरुद्वारे में भी गुरुमुखी नहीं सिखाई जाती .. साथ ही ये लोग माँ बोली कायम रखने के लिए गाव के लोग सरकार के साथ साथ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी व्  पंजाबी एकेडमी से भी गाव के स्कूल में माँ बोली गुरमुखी के अनुरोध कर रहे है ....

बाईट - कुलवंत सिंह ( स्थानीय निवासी )

वी ओ 3
ये गाव नरेला विधानसभा एरिया बिच आता है इस बारे में भाजपा के स्थानीय विधायक नीलदमन खत्री नाल गल की गई तो उनका कहना था की गाव में 99 प्रतिशत लोग पंजाबी है और स्कूल में पंजाबी भाषा होना उनका कानूनी हक़ भी है इसके लिए विधायक साहब ने कहा की वे शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलेगे और पूरे प्रयास होंगे की पंजाबी भाषा उस स्कूल में जरुर हो ..

बाईट - नीलदमन खत्री ( भाजपा विधायक नरेला )

वी ओ 4
अब जरूरत है की दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी , पंजाबी एकेडमी जैसी संस्थाए सामने आकर इस गाव की सुध ले केवल शहर तक ये संस्थाए सिमटकर न रहे .. इस तरह के देहात में इन संस्थाओं को काम करने की सबसे ज्यादा जरूरत है ... अब इस गाव को पंजाबी भाषा के विकास के लिए जुडी सस्थाओं से काफी आशाये है और देखने वाली बात होगी की कौन संस्था इनकी सुध लेती है ..

अनिल अत्री दिल्ली .........................






गाव सीखो का .. गाव की 99% पापुलेशन भी सीख धर्म की ..पर गाव के स्कूल में न पंजाबी भाषा न ही गुरुद्वारों में सिखाई जाती गुरुमुखी .. .. गाव के सिख बच्चे पंजाबी बोल तो लेते है पर पंजाबी पढ़ व लिख नहीं पा रहे है .. न सरकारो ने सुध ली न ही पंजाबी एकेडमी ने इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया .. गाव कही दूर देहात का नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली है .. गाव में में घर भी चुनिन्दा नहीं बल्कि तीन हजार से ज्यादा वोट इस गाव में है ..और बच्चे अलग ..लोगो को इस बात का दुःख की इनके बच्चे माँ बोली नहीं लिख व् पढ़ पा रहे है ...न ही गुरुद्वारे में ग्रन्थि कुछ उपराला कर पा रहे है .. माँ बोली कायम रखने के लिए गाव के लोग सरकार के साथ साथ दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी व्  पंजाबी एकेडमी से भी गाव के स्कूल में माँ बोली गुरमुखी के अनुरोध कर रहे है ....इस बारे में जब भाजपा के स्थानीय विधायक से बात की गई तो उनका कहना है की वे प्रयास करेगे यहाँ ही नहीं बल्कि जहा जहा पंजाबी परिवारो के बच्चे पढ़ते है वहा पंजाबी भाषा पढाई जाए ...

Wednesday, July 23, 2014

नरेला विधानसभा में बदहाल खेल परिसर ... विधायक साहब ने माँगा स्टेडियम ..

नरेला विधानसभा में बदहाल खेल परिसर ... विधायक साहब ने माँगा स्टेडियम .ANIL ATTRI DELHI..
एंकर - बाहरी दिल्ली के नरेला विधानसभा में पन्द्रह साल पहले बनने शुरू हुए खेल परिसर आज भी पूरी तरह नहीं बन पाए ..उस वक्त जो पैसा इन परिसरों पर लगा आज वो पैसा भी बर्बाद नजर आ रहा है .. पन्द्रह साल से सिर्फ चारदीवारी ही इन परिसरों की बनी .. एक परिसर में दो से तीन कमरे बने तो आज उन कमरों की खिड़की दरवाजे बिजली की तारे सब गायब है और ये परिसर नशेबाजो के ठिकाने बन चुके है .. परिसर में बड़ी बड़ी घास है खेल की कोई सुविधा नही .. न ही कोई कोच या ट्रेनर ... इलाके में में कई राष्ट्रिय व् अंतरराष्ट्रीय पहलवान है .. अब यहा के पहलवानों की शिकायत है की उन्हें यहाँ कच्ची धरती पर रेत पर खेलना पड़ता है .. रेत पर दौड़ लगानी पडती है पर जब वे कम्पीटिशन में जाते है तो उन्हें वहा मेट पर कुश्ती आदि लडनी पडती है ..सिंथेटीक ट्रेक पर दौड़ना पड़ता है और यहाँ अभ्यास रेट का होता है और इस कारण वे गोल्ड लाने में कई बार चुक जाते है ..  अब नरेला के विधायक ने कहा की वे इस मुद्दे को उठाए हुए है और अधिकारियों से लेकर उपराज्यपाल से भी मुलाक़ात की .. साथ ही नरेला में करीब सौ बीघे के तालाब को स्टेडियम बनाने की मांग को लेकर कोशिश में जुटे है ..कांग्रेस ने पन्द्रह साल में इनकी कोई संभाल नहीं की न काम किया लोगो को अब  भाजपा के नए विधायक व् सांसद से आश जगी है ..

वी ओ 1 नरेला विधानसभा में दो खेल परिसर है पहला नरेला सबसिटी में तो दूसरा बाकनेर गाव में और दोनों ही बदहाल है .. ये है नरेला विधानसभा के बाकनेर गाव का खेल परिसर ..खेल परिसर का काम पन्द्रह साल पहले शुरू हुआ था ... उस वक्त परिसर की चारदीवारी बनी और ये दो कमरे भी बने .. लेकिन लगातार पन्द्रह साल बीत गये किसी भी सरकार या अधिकारियों ने इसे नहीं संभाला ..यहा बिल्डिंग जर्जर हो गई .. लोग कमरों के दरवाजे उतार ले गये ..बिजली पंखे उखाड़ ले गये ..खिडकियों की लोहे की ग्रील तक चोर उखाड़ कर  ले गये ..शराबियो व् नशेड़ियो को एक अच्छा अड्डा मिल गया ..अब यहाँ खिलाड़ी प्रेक्टिस नहीं बल्कि नशेडी निवास करते है .. बड़ी बड़ी घास बदहाली सामने है .. बोर्ड के नाम तक मिट गये ... अब लोग इन स्टेडियम की बर्बादी पर नाराज है . यह इस एरिया में कई नैशनल व इंटरनैशनल खिलाड़ी है ... इन खिलाडियों को भी इन खेल परिसरों की बदहाली की शिकायत है .. इनका कहना है की हमारे बच्चो को सुविधाए दी जाए तो गोल्ड और ज्यादा आयेगे .. यहाँ हमारे बच्चे कच्ची जमीन पर दौड़ लगाते है कुश्ती जैसे दुसरे गेम्स खेलते है और जब ये बच्चे कम्पीटीशन में लाते है तो वहा मेट पर गेम्स होते है ..और सिंथेटिक ट्रेक पर दौड़ना पड़ता है पर यहाँ अभ्यास रेत का होता है इस कारण हमारे काफी बच्चे पिछड़ जाते है .. कांग्रेस ने पन्द्रह साल में इनकी कोई संभाल नहीं की न काम किया लोगो को अब नई  भाजपा सरकार से आश जगी है ..
बाईट - जितेद्र खत्री ( स्थानीय निवासी पूर्व खिलाड़ी )
वी ओ 2
ये दूसरा स्टेडियम है नरेला सबसिटी में ...यहाँ बोर्ड तो लगा है पर बाहर बोर्ड ही लगा अंदर सुविधाए नहीं .. कोई कोच ट्रेनर कुछ नहीं ..कुछ बच्चे खाली ग्राउंड देख यहाँ क्रिकेट खेलने जरुर आ जाते है पर बच्चो को भी शिकायत है की इन्हें ट्रेनिंग लेने दूर बसों में किराया देकर बाहर जाना पड़ता है और गरीब परिवारों के बच्चे जा नहि नहीं पाते और प्रतिभाये दबकर रह जाती है ....इस खेल परिसर में भी कोई सुविधा नाम की चीज नहीं ..
बाईट -  सुनील कुमार   ( खेलने वाला बच्चा )
बाईट  - मोनू
( खेलने वाला बच्चा )वी ओ 3
इस बारे में भाजपा से चुनकर आये स्थानीय विधायक नीलदमन खत्री से बात की गई वे खुद इन समस्याओ को मानते है और कहना है की वे खुद अधिकारियों से इस मुद्दे पर मीटिंग कर चुके है और इन परिसरों के लिए लगे है .. बल्कि साथ ही विधायक साहब का कहना है की वे इन खेल परिसरों के उद्धार के सतह साथ एक स्टेडियम भी अपनी विधानसभा में मांग रहे है ..इनके पास सौ बीघे का एक तालाब है वहा विधयाक साहब एरिया के लोगो के लिए स्टेडियम मांग रहे है और इस मसले पर उपराज्यपाल से भी मुलाक़ात कर चुके है ..साथ ही विधायक साहब ने खुद प्रधानमंत्री साहब को भी लिखा है और केन्द्रीय वित् मंत्री  अरुण जेटली से भी स्टेडियम के लिए बजट की मांग कर रहे है ...
बाईट - नीलदमन खत्री ( भाजपा विधायक नरेला )
वी ओ 4
अब नरेला विधानसभा के लोगो को खेल के मामले में भाजपा की नई टीम से काफी आशाये है और यहाँ के विधायक व संसद इस मामले में कुछ कम करते भी नजर आ रहे है ... अब देखने वाले बात होगी की नरेला के लोगो को खेलो के मामले में क्या मिल पाता है ..................
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अनिल अत्री दिल्ली ........................

अनिल अत्री  दिल्ली ...
ANIL ATTRI DELHI ......

Sunday, July 20, 2014

दिल्ली के संबसे महेंगे नरेला लामपुर अंडरपास की पोल पूरा बनने से पहले ही खुली..

दिल्ली के संबसे महेंगे नरेला लामपुर अंडरपास की पोल पूरा बनने से पहले ही खुली..

अनिल अत्री ..

एंकर - दिल्ली के संबसे महेंगे नरेला लामपुर अंडरपास की पोल पूरा बनने से पहले ही खुली .. इलाके में रेलवे फाटक के कारण भारी जाम रहता था और जब अंडरपास की बात आई तो सभी लोग खुश थे क्योकि करीब पैतीस करोड़ की लागत से दिल्ली का सबसे महेंगा अंडरपास यहाँ बनने जा रहा था .. दिल्ली नगर निगम ने 2009 में इस अंडरपास का शिलान्यास किया जो अठारह महीने में बनकर तैयार होना था .. लेकिन आज भी करीब चालीस प्रतिशत कम बाकी है और जो काम हुआ है उसकी क्वालिटी पर अभी से उठे सवाल ...  अंडरपास में भरता है काफी  पानी .. साथ ही बारिस में करंट आने पर सभी स्ट्रीट लाइट्स भी बंद करनी पडती है .. अंडरपास नीचे से टूटना शुरू हो गया और सरिये रोड से बाहर आ गये है .. बारीस में छत से पानी भी टपकने लगता है .. RTI से सामने आया की जो महेंगी लाइट्स लगनी थी उनकी जगह छोटी छोटी सस्ती लाइट्स लगा दी .. अंडरपास में लिफ्ट तक का टेंडर हुआ था पर सीढिया तक पूरी नहीं बन  पाई ..बारीस के वक्त अंडरपास में इतना पानी भरता है की DTC की बसे भी नहीं निकल पाती बड़ी गाडियों की तो बात दूर .. अब इलाके के कई संगठन इस समस्या व् पैसे के दुरूपयोग को लेकर अंडरपास पर धरने की चेतावनी दे रहे है ..इस मुद्दे पर नरेला के भाजपा विधायक नीलदमन खत्री ने कहा की कुछ काम बाकी है जो टेंडर में लिखा है वो काम करने होंगे ..अधिकारियो से दो दिन पहले ही हुई मीटिंग और क्वालिटी में कमी मिली तो करवाई जायेगी कानूनी कारवाई ...

वी ओ 1 ये दिल्ली का नरेला लामपुर रोड ... और इसी रोड पर ये अंडरपास बना है .. दिल्ली नगर निगम द्वारा अंडरपास का निर्माण 2009 में शुरू हुआ ..अठारह महीने समय सीमा थी लेकिन अभी तक भी ये पूरा नही हो पाया ... और पैसे के हिसाब से ये दिल्ली का सबसे महेंगा अंडरपास है ..उस वक्त पैतीस करोड़ रूपये इसके मंजूर हुए उसके बाद इसका बजट कई करोड़ रूपये और बढाया गया .. अब दिल्ली का सबसे महेंगा अंडरपास  बनना था तो इलाके के लोगो ने काफी सपने देखे थे .. अब इस अंडरपास पर अभी से सवाल उठने शुरू हो चुके है ... फेडरेशन ऑफ़ नरेला ने अंडरपास के निर्माण के कम पर कई सवाल खड़े किये है .. फेडरेशन का आरोप है की अंडरपास के निर्माण में बड़ा घोटाला हुआ है जिसकी जांच होनी चाहिए ...
...  अंडरपास में काफी पानी भरता है और इस बात को लेकर जब अधिकारियों से बात की तो कहा की पानी निकासी की मोटर चोरी हो गई .. इस पर फेडरेशन के लोगो ने अधिकारियों से FIR की कोपी मांगी तो नहीं दिखा पाए इससे साफ था की वहा मोटर लगाईं ही नहीं गई ..... साथ ही बारिस में करंट आने पर सभी स्ट्रीट लाइट्स भी बंद करनी पडती है .. अंडरपास नीचे से टूटना शुरू हो गया और सरिये रोड से बाहर आ गये है .. बारीस में छत से पानी भी टपकने लगता है .. RTI से सामने आया की जो महेंगी लाइट्स लगनी थी उनकी जगह छोटी छोटी सस्ती लाइट्स लगा दी .. अंडरपास में लिफ्ट तक का टेंडर हुआ था पर सीढिया तक पूरी नहीं बन  पाई ..बारीस के वक्त अंडरपास में इतना पानी भरता है की DTC की बसे भी नहीं निकल पाती बड़ी गाडियों की तो बात दूर की बात .....
बाईट - जोगिद्र दहिया ( अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ़ नरेला )
बाईट - सुखबीर सिंह     ( स्थानीय निवासी )
बाईट -  संजय प्रसाद    ( स्थानीय निवासी )

वी ओ 2 इस बारे में नरेला से भाजपा के विधायक नीलदमन खत्री से बात की गई तो इनका कहना है की अंडरपास का  काम पांच से दस प्रतिशत बाकी है .. स्टेंडिंग कमेटी ने भी दो दिन पहले ही इस मुद्दे पर अधिकारियों की मीटिंग ली है और हम भी अधिकारियो से मिले जल्दी से जल्दी इसका कम पूरा हो और यदि क्वालिटी में कमी की शिकायत सही मिली तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ
कानूनी कारवाई करवाई जायेगी ...
बाईट - नीलदमन खत्री ( भाजपा विधायक नरेला )
वी ओ 3
अब जनता को इस अंडरपास से जमा से जरुर काफी राहत मिली है पर लोग इस पर लगे पैसे के हिसाब से काम में अच्छी क्वालिटी चाहते है ताकि अंडरपास के कारण लोग हादसों के शिकार न हो ........................

अनिल अत्री Delhi ...........................

 

दिल्ली में भूमिगत पानी का गिरता जल स्तर ..बचाने में जुटे कुछ लोग ....

दिल्ली में भूमिगत पानी का गिरता जल स्तर ..बचाने में जुटे कुछ लोग .............
अनिल अत्री दिल्ली ..

एंकर - देश की राजधानी कंक्रीट में तबदील  हो गई

... बारीस का पानी जमीन में नहीं जा पा रहा है ..जब भी बारीस होती है पानी बहकर बेकार चला जाता है या सुख जाता है .और जमीनी पानी ट्युबल व् हेंड पम्प खिंच रहे है ..वाटर लेवल लगातार घट रहा है ... .इस घटते पानी के लेवल  को बचाने की मुहीम बाहरी दिल्ली के कुछ लोगो ने शुरू की है .. साथ ही सरकारी कानून तो पहले से है पर लोगो को उसकी जानकारी तक नहीं है .. घरो का बारीस का पानी नीचे जमीन में जाए इसके लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का पालन नरेला के कुछ लोग कर रहे है और इन्होने अपने घरो में बोर कर पानी को वापिस जमीन में डाला है ..और अब ये लोग दुसरो को भी प्रेरित कर रहे है .. अब फेडरेशन ऑफ़  नरेला ने लोगो के बीच जाकर ये बात समझानी शुरू कर दी है और लोगो को पसंद भी आ रही है और लोगो ने अपने घरो में बारीस का पानी बोर के माध्यम से दुबारा जमींन में डालने के लिए बोर करवाकर उसमे छतो के पानी का कनेक्शन करवा दिया है ..अब जरूरत है इसे दिल्ली ही नहीं पूरे भारत में कानून लागू किया जाए ये समस्या अकेली दिल्ली की नहीं बल्कि पूरे देश का यही हाल है ...  News चैनल  की पानी बचाने की इस मुहीम में नरेला से भाजपा विधायक नीलदमन खत्री ने News चैनल के माध्यम से अपनी जनता से अपील की है की लोग अपने घरो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरुर लगवाये ... अब नरेला विधायक ने भी SMS , सोसल साइट्स , पत्राचार जैसे सभी माध्यमो से वाटर हार्वेस्टिंग के प्रचार का बीड़ा उठा लिया है और विधायक साहब का कहना है की अब इस पर इतना काम करेगे की नरेला का वाटर लेवल दिल्ली में सबसे पहले उपर लाकर दिखायेगे ..

वी ओ 1 देश की राजधानी पानी की किल्लत से जूझ रही है और लगातार जूझती रही है  .. राजधानी का वाटर लेवल लगातार नीचे गिर रहा है .. ऐसे में आने वाले वक्त के लिए पानी की समस्या से बचने के लिए इस घटते लेवल को काबू पाना जरुरी है ... सबसे जरुर्री है की लोग भी इसमें सहयोग दे .सरकार भी श्ख्ती से नियमो का पालन करवाए .. दिल्ली में सरकार की तरफ से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरुरी है .. यदि आप 200 गज के दायरे में आप अपना मकान बनाते है तो रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरुरी है .. जब बारीस होती उसका पानी नालियों गलियों में जाकर वाष्प बन जाता है .. पानी का सदुपयोग नहीं हो पाता .. दूसरी तरफ जमीन का पानी लगातार टयुबल व् हेंडपम्प खिंच रहे है ..जिससे जल स्तर नीचे जा रहा है ..रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में घर की छतो व् घर में गिरने वाला बारीस का पानी बाहर नालियों में न जाकर जमीन में किये गए बोर ( सुराख ) में जाता है और पानी बेकार की बजाय जमीन में चला जाता है जिससे वाटर लेवल ज्यादा नीचे जाने में बचाव रहते है .. यदि सभी लोग अपने घरो में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये और बारीस का पानी बेकार न बहकर जमीन में चला जाए तो पूरी दिल्ली का वाटर लेवल उपर आ जाये और पानी की समस्या का समाधान हो सकता है ... बाहरी दिल्ली के नरेला में भी वाटर लेवल लगातार नीचे जा रहा है यहाँ फेडरेशन ऑफ़ नरेला ने इस लेवल को बचाने की मुहीम शुरू की है और लोगो को इस बारे में जागरूक कर रहे है ..  फेडरेशन के कुछ लोगो ने पहले अपने घरो में इसकी शुरुआत की है ...
बाईट - जोगिन्द्र दहिया ( अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ़ नरेला )
वी ओ 2
अब फेडरेशन के प्रचार के असर भी हो रहा है ..लोगो को इस बारे में जानकारी का अभाव है यदि सभी को जानकारी दी जाए काफी लोग ख़ुशी ख़ुशी ये बोर करवाना चाहते है ..क्योकि इसमें लागत भी ज्यादा नहीं .. एक से दो हजार रूपये में ये बोर हो जाता है और इस बोर में घर की छतो का पूरा पानी नीचे जमीन में चला जाता है .. और फेडरेशन का मानना है की यदि सरकार नए निर्माण का रहे लोगो को कुछ लोंन या सब्सिडी दे तो और अच्छा हो जिससे गरीब लोग भी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग कर पाए ..
बाईट - जोगिन्द्र दहिया ( अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ़ नरेला )
वी ओ 3
अब जब फेडरेशन ने लोगो को जानकारी दी और ये एक मात्र शुरुआत है लेकिन इस शुरुआत के नतीजे पोजिटिव मिल रहे है ... और यदि फेडरेशन बीस लोगो से अपील  करती है तो उनमे से एक तो सहमत हो ही जाता है ..
बाईट - राजू ( फेडरेशन से प्रेरणा लेकर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग करने वाला शख्स  टेक्स्ट - बाईट पंजाबी में है ..)

वी ओ 4 अब ये दुसरे संगठन ही नहीं बल्कि नरेला से भाजपा विधायक नीलदमन खत्री भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए जनता के बीच आये है और नरेला का गिरता जल स्तर बचाने का दावा किया है .. साथ ही News चैनल  द्वारा पानी बचाने के इस मुद्दे का समर्थन करते हुए चैनल के माध्यम से भी भाजपा विधायक नीलदमन खत्री ने अपील की है की लोग अपने घरो में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरुर लगवाये .. इसके साथ साथ विधायक साहब ने SMS , सोसल साइट्स , पत्राचार जैसे सभी माध्यमो से वाटर हार्वेस्टिंग के प्रचार का बीड़ा उठा लिया है और विधायक साहब का कहना है की अब इस पर इतना काम करेगे की नरेला का वाटर लेवल दिल्ली में सबसे पहले उपर लाकर दिखायेगे ..

बाईट - नीलदमन खत्री (भाजपा विधायक नरेला )

वी ओ 5
अब कुछ लोगो की ये अच्छी मुहीम है और इसे बड़े स्तर पर ले जाना हम सबकी जिम्मेदारी है क्योकि जल ही जीवन है ..बिना जल जीवन संभव नहीं ..जरूरत है सरकार भी इसका प्रचार प्रसार करे और इसको कानून शखती से लागू किया जाए ...  और हम भी आपसे अपील करता है की भू-जल को बचाने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का पालन जरुर करे ........................

अनिल अत्री दिल्ली ................................

Saturday, February 15, 2014

पंजाबी फिल्म इश्क ब्रांडी के कलाकारो ने किया डांस ..

पंजाबी फिल्म इश्क ब्रांडी के कलाकारो ने किया डांस ..
अनिल अत्री ..
एंकर - पंजाबी फिल्म इश्क ब्रांडी के कलाकारो ने किया बच्चो के साथ डांस ..इस फिल्म के कलाकार दिल्ली में रोहिणी के एक निजी संस्थान में फिल्म के प्रोमो के लिए आये .. कलाकरों ने स्कूल कॉलेज के बच्चो के साथ जमकर डांस किया .. बच्चे भी जमकर थिरके ..पूरा पंडाल झूम उठा ... फिल्म की शूटिंग भारत और मोरिसिश में हुई है ..कलाकारो को फिल्म से बड़ी आशा है ..फिल्म में गीतकार अल्फाज , रोशन प्रिंस , फिल्म की हिरोईन वामिका गप्पी है .. ये कलाकार दिल्ली में फिल्म को प्रमोट करने पहुंचे ..
वी ओ 1 रोहिणी के एक निजी संस्थान में झूम रहे ये कलाकर है 21 फरवरी को रिलीज होने वाले इश्क ब्रांडी पंजाबी फिल्म के .. ये जमकर इस मंच पर थिरके .. अल्फाज के सतह पूरा पंडाल नाच उठा ... कोलिज के लड़के लडकिया जमकर इन गानों पर नाचे ..( गाने व डांस के विसुअल यूज करे ..) पंजाबी कलाकारों ने सभी को झुमने पर मजबूर कर दिया .. साथ में फिल्म के डायरेक्टर , हीरो , हिरोइन सब मंच पर आये है ... हिरोइन वामिका गप्पी ने भी दिल्ली में अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए डांस किया .........( गानों के विसुअल है .....)
इस फिल्म में हिरोइन की शादी जब हीरो से तय हुई तो उसे तुड़वाने के लिए फिल्म के खलनायक मोरिसिश तक पहुंच गए ..
बाईट - वामिका गप्पी ( हिरोइन फिल्म इश्क ब्रांडी )
वी ओ 2 फिल्म के हीरो डायरेक्टर व दुसरे कलाकारो को इस फिल्म से बड़ी आशा है .. ये एक पंजाबी फिल्मो के लिहाज से बड़े बजट की फिल्म है.. और मौजूद छात्रो छात्राओं से फिल्म देखने तक की अपील कही .. कलाकरों ने कहा की उनका रिजल्ट 21 फरवरी को आएगा जिसका इन्हें बेसब्री से इन्तजार है ..
बाईट - रोशन प्रिंस कलाकार फिल्म इश्क ब्रांडी
बाईट - डायरेक्टर फिल्म इश्क ब्रांडी
वी ओ 3 अब फिल्म के कलाकार दिल्ली तक फिल्म का प्रोमो करने में जुटे है इसमें कितनी सफलता मिलती है ये आने वाला शुक्रवार ही बतायेगा .......................
अनिल अत्री ..

Saturday, September 21, 2013

दिल्ली में बिना डिग्री के डॉकटर्स करते है पोस्टमार्टम ..

दिल्ली में बिना डिग्री के डॉकटर्स करते है पोस्टमार्टम ..
एंकर - देश राजधानी में लाशो के सौदागर डॉकटर्स ...लाश के पोस्टमार्टम के बदले भी लिए जा रहे है है पैसे और पोस्टमार्टम भी कर रहे है योग्य डॉक्टर्स ..ये हाल है देश राजधानी दिल्ली का तो दूर दराज क्या होगा ...इसे भ्रष्ट डॉकटर्स  सरकारी अस्पतालों में खुलेआम काम कर रहे है .. एक एनजीओ की मशक्कत के बाद दो डॉकटर्स एंटी करप्सन की पकड में आये ..दोनों डॉकटर्स जहागिर्पुरी के बाबू जगजीवन राम अस्पताल में तैनात थे ... फिलहाल दोनों डॉकटर्स  की पुलिस ने आज तिस हजारी कोर्ट से रीमांड ले ली है ..फिलहाल पूछताछ जारी है इस मामले में सैकड़ो केस ऐसे सामने  आ सकते है जिनमे हुई हो  पोस्टमार्टम रिपोर्ट चेंज..फिलहाल दोनों भ्रष्ट डॉकटर्स से पूछताछ जारी है ..............
वी ओ 1 ये है दिल्ली सरकार का बाबु जगजीवन राम अस्पताल ...यहा भगवान माने जाने वाले डॉकटर्स की हवानिय्त सामने आई है ..यही मोर्चरी में लम्बे वक्त से दो डॉकटर्स तैनात थे डॉ सुदेश और डॉ वीके झा ..... दोनों यहा कई सालो से पोस्टमार्टम कर रहे थे ..यहा आसपास के लम्बे क्षेत्र से शव आते थे और बड़े बड़े केसों का पोस्टमार्टम इस अस्पताल में हुआ है .. लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत देखिये यहा मोर्चरी में पोस्ट मार्टम करने वाले इन डॉकटर्स के पास पोस्ट मार्टम के लिए अनिवार्य डिग्री फरेंसिक की डिग्री है ही नही और इन्हें पोस्ट मार्टम के लिए लगा दिया ..और यहा रोते बिलखते परिजनों से पोस्ट मार्टम के बदले पैसे लिए जाते ..इन्साफ के लिए लोगो को पोस्ट मार्टम रिपोर्ट का इन्तजार होता है पर ये भ्रष्ट पैसे लेकर रिपोर्ट ही बदल देते ... ये मर्डर को ख़ुदकुशी साबीत भी कर सकते है ..ये सब जांच व पूछताछ में सामने  आएगा ..जब ये बात पूरे इलाके में फैल चुकी थी तो एक एनजीओ राहुल विचार प्रचार प्रसार समिति सामने आई और आरटीआई से इन डॉकटर्स की डिग्री जानी तो सब हैरान थे इन पर फोरेंसिक की डिग्री ही नही थी ..इसकी शिकायत एनजीओ की तो प्रशासन के हाथ पाव फूल गये अस्पताल के एमएस ने इन्हें मोर्चरी से वार्ड में लगा लिया और दोनों मेडिकल लीव का बहाना बनाकर चले गये फिर एनजीओ प्रेशर किया की वे इस बात को बाहर लीक न करे और इसके बदले एनजीओ को 50 हजार रूपये नकद व 25 हजार रूपये कलाई कमाई से हर महीने देने की बात कही .. एनजीओ इतने बड़े भ्रष्टाचार को देखकर हैरान थी और एनजीओ ने एंटी करप्सन से संर्पक किया ..एंटी करप्सन की टीम ने दोनों डॉकटर्स को रंगे हाथो पचास हजार देते पकड़ लिया ...डॉ सुदेश
बाईट - शिकायत करता ( राहुल प्रचार प्रसार समिति अध्यक्ष )
वी ओ 2 आज दोनों डॉकटर्स को तिस हजारी कोर्ट में पेश किया गया जिसमे एंटी करप्सन को इन दोनों को तिन दिन की पुलिस हिरासत दी है अब दिल्ली पुलिस की एंटी करप्सन विभाग इन दोनों डॉकटर्स से तिन दिन तक पूछताछ करेगी जिसमे कई बड़े खुलासे भी हो सकते है .........
बाईट - एडवोकेट
वी ओ 3 अब जरूरत है इन डॉकटर्स को मोर्चरी तक पहुँचाने वाले एमएस पर भी कारवाई हो साथ ही इनके द्वारा किये गए सभी पोस्टमार्टम की भी जांच की जाए ..........
अनिल अत्तरी दिल्ली ...........................

कांडा केश में गीतिका व उसकी माँ के पोस्टमार्टम के वक्त डॉ सुदेश यही थे उसकी कन्फर्मेशन बाकी है ...

Wednesday, November 21, 2012


केजरिवाल ने कहा की जनता को कई और कसाब को फांसी तोड़ने की जरूरत है .
अरविन्द केजरीवाल की राजनितिक पार्टी नाम से पहले ही लोगों तक पहुंचनी शुरू हुई ..केजरीवाल और उनकी टीम अधिकतर झुग्गी झोपड़ियो में ही जाकर आवाज उठा  रही है जहा पर कोंग्रेस वोट ज्यादा है ...अब केजरीवाल टीम दिल्ली में कोंग्रेस वोट बैंक को निशाना बना रही है।। बुधवार को केजरीवाल टीम शालीमार बाग़ की झुग्गियो में पहुंची यहा करीब छे हजार परिवार इन झुग्गियो में रहते है और केजरीवाल को अछा वोट बैंक इन झुग्गियो में दिखाई   दिया और  सरकार इन झुग्गियो को तोड़ने जा रही है इन झुग्गी वासियों के समर्थन में प्रदर्शन करने केजरीवाल , कुमार विश्वास , मनीष सिसोदिया व अपनी पूरी टीम के साथ पहुंचे और सरकार पर आरोप लगाये की इन झुग्गियो के सामने एक बड़ा कोम्प्लेक्स बन रहा है जिसको इन झुग्गियो की वजह से एन ओ सी नही मिल रही है और इस कोम्लेक्स की एन ओ सी के लिए सरकार इन झुग्गियो को तोड़ने जा रही है ..
वी ओ 1 ये है केजरिवाल और उनकी टीम ...मनीष सिसोदिया , कुमार विश्वास और भी आई ए सी के लोग यहा झुग्गियो में आकर झुग्गी वालो के लिए प्रदर्शन कर रहे है ...जगह है उत्तरी पश्चिमी दिल्ली का शालीमार बाग़ ...यहा इन झुग्गियो में करीब छे हजार परिवार रहते है ..सरकार इन झुग्गियो को हटा रही है ...झुग्गी वासी विरोध कर  रहे है ..केजरीवाल टीम को भी झुग्गी वासियों का समर्थन हासिल करने का अचछा मौक़ा मिल गया और पहुंच गये इन लूग के समर्थन में .... केजरीवाल का आरोप है की यहा बन रहे बड़े कोम्प्लेक्स के लिए झुग्गिया तोड़ी जा रही है केजरिवाला ने कहा की कोम्प्लेक्स को इन झुग्गियो के कारण  एन ओ सी नही मिल रही है और कोम्प्लेक्स को एन ओ सी दिलाने के लिए सरकार इन झुग्गियो को हटाना चाहती है .....और कसाब फांसी पर केजरीवाल ने कहा की जनता को कई और कसाब फांसी तोड़ने की जरूरत है ..
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यहा सरकार के खिलाफ व भर्ष्टाचार के खिलाफ  जमकर नारेबाजी हुई ....लोग ने भी केज्रिवाला के समर्थन से राहत की सांस ली ..लूग को अब विश्वास है की केजरीवाल के आने से उनकी झुग्गिया बच जायेगी ...अब ये झुग्गिया बचे या न बचे पर इन झुग्गियो से केजरीवाल को एक अच्छा समर्थन जरूर मिल सकता है ...
अनिल अत्तरी दिल्ली ........


Tuesday, May 8, 2012

दिल्ली के चोबीस फीसदी से ज़्यादा घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं..हर चोथा घर सीवरेज से नही जुदा .....शीला सी एम् ने इसे खट्टा मीठा अनुभव माना ..


दिल्ली के चोबीस  फीसदी से ज़्यादा घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं..हर चोथा घर सीवरेज से नही जुदा .....शीला सी एम् ने इसे खट्टा मीठा अनुभव माना ..
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 दिल्ली के दस फीसदी से ज़्यादा घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं..शीला सी एम् ने इसे खट्टा मीठा अनुभव माना..ओर बोलने से बची ....सरकारी सर्वे में ये पोल खुली .. दिल्ली के दस फीसदी से ज़्यादा घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं।... CM शीला दीक्षित जहागिर्पुरी  ITI में एक कार्यक्रम में आई .....

वी ओ -1 राजधानी दिल्ली के वर्ड सिटी होने के दावे कि पोल खुली ....सरकारी सर्वे में ये पोल खुली .. दिल्ली के दस फीसदी से ज़्यादा घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं। गांवों में हालत और भी खराब है। यहां करीब 24 फीसदी घरों में शौचालय नहीं हैं। खासकर नार्थ वेस्ट दिल्ली के गांवों में हालत बहुत खराब है। यहां करीब 36 फीसदी घरों में शौचालय नहीं है। सीवेरेज के मामले में तो दिल्ली की हालत और भी खराब है।  दिल्ली का हर चौथा घर पाइप लाइन वाली सीवेज सिस्टम से नहीं जुड़ा है। उत्तरी पश्चिमी दिल्ली के नत्थूपुरा बुराड़ी इब्राहिमपुर  जैसे गाव जो कि दिल्ली  बसस्टेंड से मात्र करीब दस किलोमीटर कि दूरी पर है ..दिल्ली  विधानसभा  यहा से मात्र पांच से छे किलोमीटर है और यहा इन गावों में आज तक सीवरेज सुविधा नही ...सैकड़ों साल पुराने गाव पर अभी तक सीवरेज नही ....अधिकतर घरों में टॉयलेट सुविधा भी नही..महिलाओं तक को खुले जंगलों में शोचादी के लिए जाना पड़ता है ... वोक स्पोक ....
बाईट -  नरेंदर कुमार ( स्थानीय निवासी बुराड़ी ) - यहा आज तक कोई सीवरेज सुविधा नही ..महिलाओं को खुल्वे में शोचादी जाना पड़ता है ..
बाईट - हन्नू सिंह ( स्थानीय निवासी इब्राहिमपुर ) - ये गाव दिल्ली का गाव बस स्टेंड के पास का गाव फीर भी यहा आज तक सीवरेज सुविधा भी नही ..
बाईट - जगदीश सोदा ( प्रधान नत्थूपुरा गाव )- यहा आज तक कोई सुविधा नही ...
बाईट - भजनलाल ( स्थानीय निवासी )- यहा न सीवरेज है न टॉयलेट .बूरा हाल है .....
वी ओ फाइनल - अब ये रिपोर्ट सरकार के दावों कि पोल खोल रही है ..और सरकार है कि इसे खट्टा मीठा अनुभव मान रही है ..
बाईट - शीला दीक्षित ( CM दिल्ली ) टेक्स्ट - ये खट्टा मीठा अनुभव है कडवा तो नही ...
वी ओ 3 CM शीला दीक्षित जहागिर्पुरी  ITI में एक कार्यक्रम में आई और TATA मोटर्स के साथ जहागिरपुरी ITI का तालमेल हुआ जिसमे  
अब इस ITI के छात्र सीधे TATA मोटर्स में अभ्यास करेगें ..TATA मोटर्स यहा के छत्रों को नोकरी भी देगा ...
अनिल अत्तरी दिल्ली .............

Sunday, May 6, 2012

Questionare प्रश्नावली


Questionare
समाजिक शोध और सर्वेक्षण के क्षेत्र में सामग्री एकत्रित करने के लिए जिन विधियों का प्रयोग किया जाता है, उनमें प्रश्नावली भी एक है। इसका महत्व तथ्य संकलन और आंकडे़ एकत्रित करने के लिए बहुत होता है। यह प्राथमिक तथ्यों को संकलित करने में बहुत योगदान देती है। इसमें विषय समस्या से संबंधित प्रश्न रहते हैं। आमतौर पर सर्वेक्षण के लिए इसके अलावा अनुसूची का भी प्रयोग किया जाता है। क्योंकि ये दोनों ही समान सिद्धांतों पर आधारित होती है। इसी आधार पर लुण्डबर्ग ने प्रश्नावली को एक विशेष प्रकार की अनुसूची माना है जो प्रयोग की दृष्टि से अपनी निजता स्थापित करती है। 
अर्थ-
       साधारणतया किसी विषय से संबंधित लोगों से सूचना प्राप्त करने के लिए बनाए गए प्रश्नों की सुव्यवस्थित सूची को प्रश्नावली की संज्ञा दी जाती है। अर्थात प्रश्नावली अनेक प्रश्नों से युक्त एक सूची होती है जिसमें अध्ययन विषय  से जुड़े  विभिन्न पक्षों के बारे में पहले से तैयार किए गए प्रश्नों का समावेश होता है। शोधकर्ता इसे डाक के माध्यम से उत्तरदाताओं को भेजते है। उत्तरदाता उसे पढ़कर, समझकर और उसमें पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भरकर पुनः डाक से शोधकर्ता के पास भेज देता है। आम तौर पर यह कहा जा सकता है कि विषय समस्या से संबंधित तथ्यों को संग्रहित करने के उद्देश्य से निर्मित क्रमबद्ध प्रश्नों की वह सूची जिसका उपयोग डाक द्वारा किया जाता है प्रश्नावली कहलाती है।
परिभाषा- 
        जे डी पोप ने लिखा है कि एक प्रश्नावली को प्रश्नों के एक समूह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसका उत्तर सूचनादाता के बिना एक शोधकर्ता अथवा प्रगणक की व्यक्तिगत सहायता से देना होता है। 
बोगार्डस ने प्रश्नावली को परिभाषित करते हुए लिखा है। प्रश्नावली विभिन्न व्यक्तिओं को उत्तर देने के लिए दी गई प्रश्नों की एक तालिका है। 
प्रश्नावलियो की निर्माण विधियां -
                       प्रश्नावली प्रविधि तथ्य एकत्रित करने की एक प्रमुख प्रविधि है। इसलिए यह आवश्यक होता है कि प्रश्नावली का निर्माण इस तरह से किया जाए कि उपयोगी साबित हो । प्रश्नावली का निर्माण जितना सावधानीपूर्वक एवं सुव्यवस्थित रूप से किया जाता है। शोध के लिए सामग्री का संकलन उतना ही उपयोगी हो जाता है। प्रश्नावली में सूचनादाताओं को स्वयं ही प्रश्नों को समझकर उनका उत्तर देना होता है। इसलिए प्रश्नावली के निर्माण के समय सूचनादाताओं के ज्ञान के आधार क्षेत्र को बढ़ाना होता है। इसमे बिना शोधकर्ता की मदद के ही उत्तर देना होता है। इसलिए प्रश्नावली का निर्माण इतना सरल और स्पष्ट होना चाहिए कि उत्तरदाता उसे आसानी से भरकर भेज सके। प्रश्नावली की रचना को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। जो निम्नानुसार है-
 1 अध्ययन की समस्या
  
 2 प्रश्नों की उपयुक्तता
 3 बाहरी आकार
1 अध्ययन की समस्या- प्रश्नावली का निर्माण करते समय सबसे पहले यह आवश्यक होता है कि अध्ययन की समस्या को भली भांति समझा जाए। न केवल इसे समझना बल्कि इसका विश्लेषण करना भी आवश्यक है। इसमें निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
1 पूर्ण जानकारी
2 क्षेत्र एवं सूचनादाता
3 अध्ययन की इकाई
1 पूर्ण जानकारी- प्रश्नावली का निर्माण करते समय अध्ययन समस्या की पूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।  इसे न केवल समझ लेना चाहिए बल्कि पूर्णतया देख’-परख भी लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो अध्ययनकर्ता को प्रश्न रचना के समय अनेक समस्याओं का सामना करना पड़  सकता है। इसलिए अध्ययनकर्ता का  समस्या के विभिन्न पक्षों से परिचित होना आवश्यक होता है। अध्ययनकर्ता को चाहिए कि वह विषय से संबंधित विशेषज्ञों से भी पूर्ण जानकारी प्राप्त कर ले। ऐसा करने पर ही प्रश्नावली का निर्माण उचित चरणों में पूरा हो सकेगा।
2 क्षेत्र और सूचना दाता - प्रश्नावली का निर्माण करते समय क्षेत्र और सूचनादाता के बारे में जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होता है। अर्थात क्षेत्र का विस्तार कितना है और सूचनदाताओं की संख्या कितनी है इन बातों का ध्यान आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए यदि भौगोलिक क्षेत्र बड़ा हो और समस्या की प्रकृति सामान्य हो तो सूचनादाता की संख्या अधिक होती है। इसमें निर्दशन प्रणाली के माध्यम से सूचनादाताओं की संख्या का निर्धारण करना पड़ता हैं।
3 अध्ययन की इकाई - प्रश्नावली का निर्माण करते समय यह स्पष्ट करना होता है,कि अध्ययन की इकाई क्या है। ऐसा करना इसीलिए आवश्यक होता है ताकि उत्तरदाता इन इकाईयों को एक ही अर्थ में समझे ताकि उसे एक ही प्रकार की सूचनाएं प्राप्त की जा सके । उदाहरण के लिए यदि बालकों का अध्ययन करना हो प्रश्नावली में बालकों की आयु का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
4 प्रश्नों की उपयुक्तता - इससे तात्र्पय यह है कि प्रश्नावली में किसी भी प्रश्न को शामिल करने के पूर्व वह विषय से संबंधित सूचना का संकलन करने में किस हद तक सहायक होगा। अनुपयुक्त प्रश्नों के शामिल होने से धन,समय और श्रम का दंुरूपयोग होता है और न ही अपेक्षित सफलता मिल पाती है। इसलिए प्रश्नों का उपयुक्त होना अंत्यत आवश्यक होता है। प्रश्न का निर्माण सरल,सटीक और व्यवस्थित होना चाहिए क्योंकि प्रश्नावली निर्माण के समय हमेशा इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उत्तरदाता को बिना शोधकर्ता की सहायता से ही प्रश्नो को उत्तर देना रहता है। अर्थात प्रश्न हर ढंग से उपयुक्त हो । उपयुक्त प्रश्नो का अपना एक अलग महत्व होता है।
प्रश्नों की उपयुक्तता के नजरिये से निम्न बातें आवश्यक होती है।
1 प्रश्नों की स्पष्टता और विशिष्टता- प्रश्नावली का निर्माण करते समय शोधकर्ता को हमेशा इस बात का ध्यान रखना होता है कि प्रश्न स्पष्ट और विशिष्ट हो। अर्थात ऐसे प्रश्नों के निर्माण करने से हमेशा बचा जाना चाहिए जो अस्पष्ट और अनिश्चित वाले हो या फिर भ्रामक हो । अ्रगर ऐसे प्रश्नों का समावेश प्रश्नावली मे होगा तो वह दोषपूर्ण बन जाएगी जिससे शोध का उद्देश्य भी पूरा नही होगा । इसके साथ ही अस्पष्ट, दोषपूर्ण, द्विअर्थी और अप्रचलित प्रश्नों के प्रयोग से भी बचना चाहिए। प्रश्नो के निर्माण में विशिष्ट शब्दावली का भी प्रयोग नही किया जाना चाहिए।
2 सरल प्रश्न- अगर प्रश्नावली में सरल प्रश्नो का समावेश होगा तभी प्रश्नों की उपयुक्तता साबित होगी । अगर प्रश्न सरल होंगें तो सामान्य ज्ञान वाला भी उसे ठीक से समझेगा और उसका सही सही जवाब देगा। साथ ही प्रश्नों के सरल रहने से अध्ययनकर्ता के बिना भी उसका उत्तरदाता अपेक्षित अर्थ लगाकर प्रश्नो का सही सही जवाब देगा। क्योंकि खुद प्रश्नकर्ता उत्तरदाता के पास नही होता इसलिए सरल प्रश्न होना आवश्यक होता है।
3 संक्षिप्त और श्रेणीबद्व उत्तर - प्रश्नावली के निर्माण में इस बात का ध्यान देना चाहिए कि उसमें प्रश्न संक्षिप्त ही रहें। अगर प्रश्न छोटे होगें तो प्रश्नावली भरते समय उत्तरदाता जवाब देने में बोर नहीं होगा ना ही उसे कोई हिचकिचाहट होगी । प्रश्न न केवल न संक्षिप्त होने चाहिए बल्कि उनमें क्रमबद्वता भी होनी चाहिए। यदि यह उत्तर हां या न में होतो यह प्रश्न ज्यादा ठीक माना जाता है।साथ ही बहुविकल्पनात्मक प्रश्न भी सही होते है।क्यों कि इसमें उत्तर दाता को अपने मन से विकल्प चुने जाने की आजादी होती है।
4 वैषयिक प्रश्न- प्रश्नावली के निर्माण में इसकी उपयुक्तता इस बात पर निर्भर करती है वैषयिक प्रश्नों का समावेश इसमें किया जाए। इस दौरान प्रश्नों में किसी प्रकार का झुकाव नही होना चाहिए। अ्र्रगर इस तरह के प्रश्न इसमें शामिल है तब उत्तरदाता से सही और वास्तविक उत्तर निकलवाए जा सकेगें।
5 कम प्रश्न- प्रश्नावली में कम से कम प्रश्नो का समावेश करना चाहिए। इससे प्रश्नावली जल्दी भर जाएगी और उत्तरदाता की अभिरूचि भी बनी रहेगी। अधिक प्रश्नों के समावेश से प्रश्नावली  के निर्माण में समय,धन और श्रम तीनों की बर्बादी होती है।
6 बचाव वाले प्रश्न- प्रश्नावली में उत्तरदाता के गोपनीय जीवन से संबंधित प्रश्नों को शामिल नही किया जाना चाहिए। गोपनीय और गहन सूचनाओं वाले प्रश्नों से हमेशा बचना चाहिए क्योंकि ऐसे प्रश्नों के उत्तर कोई भी आसानी से नहीं देता है। अपराधी प्रवृत्ति और यौन व्यवहार से संबंधित प्रश्न इसी तरह के होते हैं। इसी तरह वैयक्तिक, भावनात्मक और प्रतिष्ठा वाले प्रश्नों से भी बचा जाना चाहिए। इसके अलावा पक्षपातपूर्ण और रूढ़िवादी प्रश्नों से भी बचा जाना चाहिए।
7 स्पष्ट भाषा- प्रश्नों में चयन में सावधानी बरती जानी चाहिए बल्कि भाषा की स्पष्टता पर भी ध्यान देना चाहिए। स्पष्ट भाषा उत्तरदाता आसानी से समझ जाते हैं। इसमें कठिन, अस्पष्ट, अप्रचलित दुरूह और क्लिष्ट शब्दों का चयन नहीं किया जाना चाहिए। बहु अर्थी, भावात्मक और अनुमानित सूचना वाले शब्दों का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। स्पष्ट भाषा के साथ- साथ प्रश्नावली की इकाइयॉं भी स्पष्ट होना चाहिए।
8 क्रमबद्वता- प्रश्नावली का निर्माण करते समय प्रश्नों को स्वाभाविक रूप से क्रमबद्व और व्यवस्थित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। साथ ही प्रश्नों के परस्पर अंतर्सबंद्वता का गुण भी होना चाहिए । इससे प्रश्नों में तारतम्यता बनी रहेगी एवं प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अगले प्रश्न के उत्तर के लिए पूरक कार्य करेगा। अधिक प्रश्नों को शिर्षक और उपशीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है। गलत, व्यंग्यात्मक, दकियानूसी, कल्पनात्मक और प्रभावशील प्रश्नों को इसमें शामिल नही किया जाना चाहिए।
9 बाह्य आकार - प्रश्नावली में प्रश्नो के निर्माण के साथ-साथ उसमें भौतिक बनावट का भी महत्व होता है। उत्तरदाता के पास नही होने के कारण प्रश्नकर्ता उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रश्नावली की बाहरी आकृति जैसे - उसका आकार, कागज, छपाई और रूप रंग आदि पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक होता है। प्रश्नावली के बाहरी आधार के अन्र्तगत निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए।
1 आकार - प्रश्नावली का निर्माण करते समय इसे आकर्षक आकार में निर्मित किए जाने की आवश्यकता होती है। इसे सामान्यतः फुलस्केप आठ बाय बारह और नौ बाय ग्यारह के आकार के कागज पर बनाया जाना चाहिए। लंबे लिफाफे में मोड़कर रखने के कारण यह आकार बहुत उपयुक्त होता है। कम पृष्ठ होने से डाक खर्च भी कम आता है। साथ ही इसे उत्तरदाता तक भेजना भी आसान हो जाता है।
2 कागज- प्रश्नावली का निर्माण करते समय उसके कागज पर ध्यान देना आवश्यक होता है। यह कागज चिकना, कड़ा और टिकाउ होना चाहिए। इसका आकर्षक स्वरूप प्रश्नावली को सुंदर बनाता है। जबकि खुरदरा कागज न केवल जल्दी फट जाता है साथ ही इसकी छपाई भी अच्छी नहीं होती है। एक जैसे शोध के लिए भेजे जाने वाली प्रश्नावलियां अलग अलग कागज पर होना चाहिए।
3 छपाई- प्रश्नावली को अक्सर या तो छाप दिया जाता है या साइक्लोस्टाइल करवाया जाता है। इन दोनों ही तरीकों में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि छपाई शुद्ध और स्पष्ट हो ताकि आसानी से इसे पढ़ा जा सके । स्याही न फैले इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
4- हाशिया छोड़ना- प्रश्नावली का निर्माण करते समय बायीं ओर 3 बाय 8 और दायीं ओर 1 बाय 7 या 1 बाय 6 का हाशिया छोड़ना चाहिए। इस स्थान पर टिप्पणी लिखी जा सकती है। इसमें शब्दों और दो प्रश्नों के मध्य स्थान छोड़ा जाना चाहिए।
5 प्रश्नावली की लंबाई- प्रश्नावली का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसमें प्रश्नों की संख्या इतनी नहीं होना चाहिए कि संपूर्ण प्रश्नावली अनेक पृष्ठों में छप सके। लंबी प्रश्नावली से उत्तरदाता की रूचि खत्म हो जाती है। इसकी लंबाई इतनी होना चाहिए कि इसे कम से कम आधे घंटे मेें भरा जा सके। अभी तक पचास पृष्ठों तक वाली प्रश्नावली उपयोग में लाई जा चुकी है।
6 रूप- रंग- प्रश्नावली का निर्माण करते समय उसके रूप रंग भी ध्यान देना चाहिए। प्रश्नावली इतना आकर्षक होना चाहिए ताकि उत्तरदाता उस पर लिखने के लिए बेताब हो जाए। इस पर अक्षर स्पष्ट होना चाहिए साथ ही कागज मोटा और अच्छा होना चाहिए। रंगीन कागज का प्रयोग से यह और भी आकर्षक हो जाता है। इस प्रकार यह पता चलता है कि प्रश्नावली का निर्माण करते समय उसके रूप रंग और बाहरी आकर्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
7 मदों की व्यवस्था- प्रश्नावली का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसमें एक विषय से संबंधित सभी प्रश्नों को एक साथ एक क्रम में लिखा जाए। आवश्यकतानुसार प्रश्नों को विभिन्न उपसमूहों में भी वर्गीकृत किया जा सकता है। प्रश्नावली में शीर्षक, उपशीर्षक एवं सारणियों आदि सही क्रम में छपे होने चाहिए जिससे अध्ययन करने में सुविधा प्रतीत हो।
              
                इस तरह हम कह सकते है। प्रश्नावली के निर्माण में न केवल प्रश्नो पर ध्यान देना चाहिए साथ ही इसके बाहरी स्वरूप पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है..अनिल अत्री .........

Scheduling अनुसूची


Scheduling
समाजिक शोध के क्षेत्र में तथ्य संकलन के लिए जिन विधियों का प्रयोग किया जाता है उनमें एक अनुसूची है। इसमें प्राथमिक और द्वितियक स्त्रोंत होते हैं। प्राथमिक स्त्रोत के अन्र्तगत घटनाओं को स्वंय देखकर, सुनकर या संबंधित व्यक्तिओं से मिलकर तथ्यों को एकत्रित किया जाता है। द्वितीयक स्त्रोतों के अन्र्तगत अध्ययनकर्ता विषय से संबंधित प्रलेखों का अध्ययन कर तथ्य एक़ित्रत करता हैं। समाज की विभिन्न समस्याओं के अध्ययन के लिए सामाजिक शोध के क्षेत्र में प्रश्नावली और सूची बनाने का व्यापक महत्व होता है बाहरी रूप से यह दोनो काफी हद तक समान दिखते हैं लेकिन वास्तविक अर्थो में इन दोनो की प्रकृति और आयोग की प्रक्रिया एक दूसरे से अलग होती है।
परिभाषा-
    सामाजिक शोध के क्षेत्र में अनुसूची तथ्य को एकत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण विधि हैं
पीवी यंग और गुड्डे एवं हॉट के अनुसार अनुसूची प्रश्नों की वह सूची है जिसका प्रयोग साक्षात्कार के दौरान सामाजिक समस्याआ के अध्ययन में किया जाता है।
लुण्डबर्ग के अनुसार अनुसूची का प्रयोग उत्तरदाता से पूछे जाने वाले प्रश्नों को याद करने से शोधकर्ता को बचाता है। क्योंकि शोधकर्ता के साथ प्रश्नों की सूची रहती है। और वह उत्तरदाता से एक जैसे प्रश्न पूछता है। अनुसूची एक सामान्य अवधारणा है जिसका प्रयोग किसी भी प्रणाली द्वारा तथ्यों के सग्रंह मंें किया जाता है।
बेगार्डस के अनुसार अनुसूची उन तथ्यों को प्राप्त करने की औपचारिक प्रणाली का प्रतिनिधित्व करती है जो वैषयिक रूप में है। तथा सरलता से प्रत्यक्ष योग्य है।
विशेषताएं-
एक अच्छी या उत्तम अनुसूची प्रश्नों और उत्तरों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। अर्थात प्रश्न इस प्रकार होना चाहिए जिससे वास्तविक तथ्य मालूम किए जा सकें। साथ ही प्रश्नों का सूचनादाता सही अर्थो में समझकर उचित उत्तर दे सके। एक बेहतर अनुसूची में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं।
1 सही संदेश वाहन- एक अच्छी अनुुसूची की पहली विशेषता यह है कि इसमें प्रश्नों को इस प्रकार पूछा जाता है कि उन प्रश्नों के संंबंध में किसी भी उत्तरदाता के मन में कोई गलत धारणा न पनप पाए। अर्थात शोधकर्ता के द्वारा पूछे गए प्रश्न उसी रूप में उत्तरदाता को मिले। अनुसूची की भाषा सरल, स्पष्ट, भ्रमरहित और अर्थ प्रदान करने वाली होना चाहिए।
2 सही प्रत्युतर- उत्तम अनुसूची की दूसरी विशेषता के रूप में सही प्रत्युतर प्राप्त होना होती है। इसकी पहचान तभी कायम होती है जब उस अनुसूची के आधार पर सूचनादाता सही उत्तर देता है जो शोधकर्ता के लिए उपयोगी और आवश्यक होता है। सही प्रत्युतर का मायना यह है कि सूचनादाता द्वारा दी गई जानकारी वास्तविक हो और उसमें कोई दुविधा न हो।
3 प्रश्नों का उचित क्रम- एक अनुसूची में प्रश्नों का क्रमबद्ध तरीके से लिखा जाना चाहिए ताकि उनमें आंतरिक संबंधता आ सके और उत्तरदाता सभी प्रश्नों की व्यवस्थित रूप में जानकारी दे सके ।
4 सरल और स्पष्ट प्रश्न- एक अच्छी अनुसूची में प्रश्न सरल और स्पष्ट भाषा में होना चाहिए ताकि उत्तरदाता को प्रश्न समझने में आसानी रहे। हालांकि इस विधि में सूचनादाता और प्रश्नकर्ता एक दूसरे के समक्ष रह कर चर्चा करते है उसके बाद भी इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रश्न सरल और स्पष्ट हों।
5 सीमित आकार - प्रश्नों की संख्या समस्या की प्रकृति पर निर्भर करती है फिर भी एक अच्छी अनुसूची का आकार निश्चित होना चाहिए इसमें अनुसंधान की समस्या से संबंधित प्रश्नों को ही शामिल किया जाना चाहिए।
6 क्रास प्रश्नों की व्यवस्था- एक अच्छी अनुसूची उसे माना जाता है जिसमें समस्या से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में क्रास प्रश्न पूछे जाने की व्यवस्था हो ताकि सूचनादाता द्वारा दी गई जानकारी की जांच प्रश्नों के आधार पर की जा सके।
7 सामान्य शब्द- अनुसूची में सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए अध्ययनकर्ता को अनुसूची में खड़ी बोली का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हमेशा सीधे और बोल चाल वाले शब्द ही प्रयोग में लाने चाहिए।
8 सम्मानजनक प्रश्न- इसमें हमेशा सम्मानजनक प्रश्नों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए ताकि उत्तरदाता को किसी भी प्रकार का आघातों न पहुंचे। आमतौर पर अध्ययनकर्ता को प्रश्नों में विकट शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए।
9 सांख्यिकीय विवेचना - इसमें ऐसे प्रश्नो का समावेश होना चाहिए ताकि अध्ययनकर्ता उत्तरदाताओे द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तथ्यों की सांख्यिकीय विवेचना कर सके।
10 सूख का अनुभव - इसके अलावा प्रश्न ऐसे हो जिससे सुख का अनुभव हो साथ ही छोटे प्रश्नो का उपयोग भी होना चाहिए। प्रश्न ऐसे होना चाहिए जो अध्ययन के विषय की प्रकृति और उद्देश्य से संबंधित हो ।

अनुसूची प्रश्नों की एक सूची होती है। इसका निर्माण सोच समझकर सावधानीपूर्वक किया जाता है। यह निर्माण करना कोई सरल कार्य नहीं होता है। इसके निर्माण की प्रक्रिया के विभिन्न स्तर होते हैं। यह स्तर निम्नलिखित हैं।
1  अनुसूची निर्माण के पहले चरण में इसके निर्माण से संबंधित विभिन्न पक्षों पर विचार किया जाता है। इसके निर्माण के पहले यह निश्चित कर लेना चाहिए कि इसमें अध्ययन विषय से संबंधित किन किन विषयों को सम्मिलित किया जाएगा। इस स्तर में शोधकर्ता अध्ययन की समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त करता है। ऐसा करना इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि अगर अध्ययन की समस्या की प्रकृति का पूर्ण ज्ञान नहीं होगा तब तक उसके संबंध में प्रश्नों का ज्ञान भी नही हो सकेगा। इससे शोधकर्ता को यह पता चल जाता है कि विषय में कौन कौन से पक्ष अधिक और कौन कौन से कम महत्वपूर्ण हैं। इसके अलाव अध्ययन की समस्या के मुख्य पहलुओं का भी पता चल जाता है जिनके माध्यम से विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पहले से ऐसा कर लेने से अनुसूची में प्रश्नों का एक संतुलित अनुपात बनाए रखना संभव हो पाता है। साथ ही इसमें अनावश्यक प्रश्नों का जमाव होने से भी बचा जा सकता है। पूर्ववर्ती विचार और समस्या के संबंध में आवश्यक जानकारी इसलिए भी आवश्यक होती हैं क्यों कि शोधकर्ता विषय के संबंध में एक संतुलित धारणाओं को पनपाए बिना ही अनुसूची में उन सभी मदों और पहलुओं को सम्मिलित करना चाहते हैं। जो उन्हे महत्वपूर्ण और रूचिकर प्रतीत होतो हैै। इस प्रवृत्ति से धन,समय और शक्ति का अपव्यय होता है। इस स्थिति से बचने के लिए एक संतुलित प्रश्न सूची को बनाए रखना आवश्यक होता है। इसको बनाए बिना यह संभव है कि कुछ महत्वहीन पक्षों को  अनुसूची में मान्यता मिल जाए और महत्वपूर्ण पक्ष अनुसूची से छुट जाए। इस लिए पूर्व ज्ञान के आधार पर अध्ययन समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त की जाती है।
 
2  दूसरे चरण में इसका आकार निर्धारित किया जाता है। इस स्तर में शोधकर्ता यह निश्चित करता है कि अनुसूची के अंदर कितने प्रश्न रखें जाएं। अनुसूची का आकार, समस्या की प्रकृति, अध्ययन क्षेत्र की प्रकृति, अध्ययन के लिए प्राप्त धनराशि और समय आदि पर निर्भर करती है। अध्ययन विषय को विभिन्न पक्षों में विभाजित किया जाता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक उपविभाग के संबंध में सभी विषय स्पष्ट हो। इसके लिए दो बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। इसमें पहली बात यह है कि इस प्रकार के प्रश्नों को अनुसूची में सम्मिलित करने पर पहलू विशेष पर अधिक ध्यान दिया जाए। दूसरी बात यह कि इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तरों से प्राप्त सूचनाओं का शोध के उद्देश्य की पूर्ति में अधिकाधिक उपयोग हो। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि इस स्तर में अध्ययन विषय के विभिन्न पक्षों के उपविभागों और उनसे संबंधित प्रश्नों के विस्तार, प्रकृति और उसकी उपयोगिता के विषय में निश्चित कर लिया जाता है। अगर मनोवृत्ति, भावनाओं ओर विचार आदि मनोवैज्ञानिक समस्याओं के अध्ययन के लिए अनुसूची का निर्माण किया जाता है तो इसका आकार बड़ा रखा जाता है। इसके विपरित घरेलू दशा, साक्षरता, व्यवसाय और पोशाख स्टाईल आदि समस्याओं के अध्ययन के लिए अनुसूची का निर्माण किया जात है तो अनुसूची का आकार छोटा रखा जाता है। साथ ही अगर अध्ययन के लिए धनराशि एवं समय अधिक प्राप्त रहता है। तब तुलनात्मक रूप में अनुसूची का आकार बडा रखा जाता है एवं यदि धनराशि और समय कम रहता है तब अनसूची का आकार छोटा रखा जाता है।
3  अनुसूची के निर्माण की प्रक्रिया का तीसरा स्तर प्रश्नों के निर्माण से संबंधित होता है। इस स्तर पर इस बात की सावधानी रखनी पड़ती है कि जल्दबाजी में प्रश्नों का निर्माण न हो जाए। प्रश्नों की प्रकृति पर ही यह निर्भर करता है कि उत्तरदाता उन प्रश्नों के सही अर्थ को समझकर सही उत्तर दे सकेगा या नहीं । इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रश्नों की भाषा जटिल, अस्पष्ट, संदेहयुक्त और बहुअर्थक न हो । साथ ही जिन प्रश्नों से उत्तरदाताओं को कोई क्षोभ पहुंचे या उत्तर देने में किसी प्रकार का संकोच हो, ऐसे प्रश्नों के निर्माण से भी बचा जाना चाहिए। सरल, स्पष्ट और ठीक ढंग से पूछे गए विनम्र प्रश्न उत्तरदाता से सही उत्तर स्वयं ही प्राप्त कर लेता है। जबकि गलत ढंग से पूछे गए प्रश्न उत्तरदाता के मन को विचलित कर देते है। जिसके चलते वह या तो उत्तर नहीं देता और देता भी है तो अनमने ढंग से । विषय से संबंध न रखने वाले प्रश्नों को भी शामिल नही किया जाना चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रश्नों का निर्माण सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि प्रश्न विश्वसनीय तथ्य संग्रह करने में सक्षम हों। प्रश्नों का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि समस्या के विभिन्न पहलूओं के संबंध में विस्तृत और विश्वसनीय आंकड़े इन प्रश्नों द्वारा प्राप्त हो सके। हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि अनुसूची में कई अर्थो वाले या फिर उत्तरदाताओं को विचलित करने वाले प्रश्नों का चयन नही करना चाहिए।
4  चैथे स्तर में प्रश्नों को एक सिल- सिलेवार ढंग से क्रमबद्व सजाया जाता है। इस समस्या से संबंधित सभी प्रश्न को एक ही जगह रखा जाता है। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि उत्तरदाताओं की आसानी के लिए कैसी क्रमबद्धता होनी चाहिए। उत्तरदाताओं का नाम, लिंग, आयु, ज्ञान, धर्म, वैवाहिकी, स्थिति, आमदनी और व्यवसाय आदि की जानकारी से संबंधित प्रश्नो का सबसे उपर और मुख्य प्रश्नों को नीचे रखा जाना चाहिए। लेकिन सबसे उपर अध्ययन की समस्या के विषय का उल्लेख भी किया जाना चाहिए। यदि इसमें उस विषय के उद्देश्य भी दिया गया हो तो यह और भी अच्छा माना जाता है। प्रश्नो का क्रम में बनाने से उत्तरों के माध्यम से तथ्यों की प्राप्ति उसी क्रम में होती है, जिस क्रम में तथ्यों की व्याख्या, विश्लेषण और रिपोर्ट लिखनी होती है। क्रम से लगे प्रश्नों के द्वारा उत्तरदाता से भी शीघ्रता से उत्तर मिल जाता है। सरल से जटिलता की ओर प्रश्न का क्रम होने से उत्तरदाता सरल प्रश्नों को पहले करके जटिल के लिए मानसिक तौर पर तैयार भी हो जाता है। क्रमबद्वता के दौरान यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा कोई प्रश्न न शामिल न हो जिसका उत्तर न मिल सके ।
5  अनुसूची निर्माण की अंतिम प्रक्रिया अनुसूची की सार्थकता की जांच करने से संबंंधित होता है। अर्थात प्रश्नों को क्रमबद्व रूप में रखने के बाद अनुसूची के दोषों की जानकारी प्राप्त करने के लिए पूर्व- परीक्षण या सर्वेक्षण कराया जाता है। इसके अलावा कुछ पर अनुसूची लागू कर देखा भी जाता है कि उसमें कोई अनावश्यक प्रश्न तो शामिल  नही है। अगर कोई प्रश्न छूट गया है तो उसका भी पता चल जाता है। अनुसूची को दोषरहित और अधिक सार्थक बनाने के उद्दश्य से पूर्व सर्वेक्षण किया जाता है। पूर्व- सर्वेक्षण के अनुभव के आधार पर अनुसूची में संशोधन  किया जाता है और अंतिम रूप अनुसूची का निर्माण किया जाता है। ऐसा कर लेने से आगे आने वाली समस्याओं का निराकरण हो जाता है।

Types of scales
किसी भी अध्ययन को यथार्थता और वैज्ञानिकता प्रदान करने के लिए निश्चित अनुमापन  बहुत आवश्यक होता है। सामाजिक विज्ञान में अध्ययन को यर्थाथ बनाने के लिए समाजिक घटना के गुणात्मक और गणनात्मक दोनो पक्षों का अध्ययन अनिवार्य होता है। इस प्रयास का परिणाम अनेक मापक यंत्रों, पैमानों अनुमापों अथवा स्केलिंग प्रविधियों का निर्माण है जिनकी सहायता से विभिन्न सामाजिक घटनाओं और समस्याओं के प्रति लोगों की मनोवृत्तियांें, नजरिया और दूरी को मापा कर इनका मूल्याकन किया जा सकता है।
अनुमापन या पैमाने किसी सामाजिक घटना या समस्या के विषय में व्यक्तिओं की राय और मनोवृत्तियों को मापने के यंत्र हैं। पैमाने गुणात्मक तथ्यों को गणनात्मक तथ्यों में परिवर्तित करने की प्रविधियां है  और क्रम का निर्धारण करने में इनका विशेष महत्व है। अतः पैमाना किसी घटना अथवा वस्तु को मापने का एक यंत्र है। अध्ययन वस्तु की प्रकृति के अनुसार ही पैमानों का निर्माण किया जाता है। जिस प्रकार प्राकृतिक विज्ञानों में विभिन्न वस्तुओं को मापने के यंत्र भिन्न- भिन्न होते हैं उसी प्रकार सामाजिक घटना की विशिष्ट प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उसी के अनुसार पैमानों का निर्माण किया जाता है ।
परिभाषा-
 गुडे तथा हॉट के मुताबिक- अनुमापन प्रविधियों में अन्तर्निहित समस्या इकाइयों की श्रेणियों को एक क्रम के अन्तर्गत व्यवस्थित करने की है। दूसरे शब्दों में अनुमापन प्रविधियां गुणात्मक तथ्यों की श्रेणियों को गुणात्मक श्रेणियों में बदलने की पद्धतियां है।
पी वी यंग के अनुसार- किसी वस्तु या घटना की मात्रा या भार को मापने के लिए जिस पैमाने का प्रयोग किया जाता है, उसके आधार पर जिन अनुमापन साधनों का निर्माण किया जाता है, उसे अनुमापन प्रविधि कहते है।
डॉ आर एन मुकर्जी - अनुमापन का तात्र्पय पैमाइश की उस विधि से है जिसके द्वारा गुणात्मक तथा अमूर्त सामाजिक तथ्यों या घटनाओं को गणनात्मक स्वरूप दिया जाता है।
पैमाना पध्दतियों के प्रकार -
गुणात्मक मीडिया शोध में क्रमाबद्धता, तार्किकता और वैज्ञानिकता लाने के लिए पैमाने के प्रयोग को अधिक महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। श्रीमती यंग के अनुसार दो प्रकार के मानवीय व्यवहार के माप के लिए विभिन्न यंत्रों का निर्माण हुआ है।
1  मनुष्य के संचार तथा व्यक्तिगत को मापने वाले पैमाने जिनके द्वारा प्रवृत्तियां, नजरिया, नैतिकता, चरित्र और सहयोग आदि की माप ली जाती है।
2  संचार संस्कृति और सामाजिक पर्यावरण को मापने वाले पैमाने जिनके द्वारा संस्थाओं, संस्थागत व्यवहार,संचारिक तथा सामाजिक स्थिति, आवास व्यवस्था, रहन सहन आदि की माप ली जाती है।
मीडिया या संचार के क्षेत्र में प्रमुख पैमाने निम्नलिखित है। -
1 अंक पैमाना- इस पैमाने में कुछ शब्द लिख दिए जाते हैं प्रत्येक शब्द का एक अंक होता है। सूचनादाता जिन शब्दोे को प्रसन्नता देने वाला समझता है उसके आगे सही का चिन्ह लगा देता हैं । जितने सही के निशान होते है, उनकी गिनती कर ली जाती है। इस प्रकार कुल योग ही प्राप्ताक होते है। इन अंको के आधार व्यक्ति के मनोभावों और प्रवृत्तियों का पता लग जाता है।
2 संचार रिक्तता मापन यंत्र - इस तरह के पैमानों द्वारा भिन्न भिन्न वर्गों अथवा व्यक्तिओं के मध्य पाए जाने वाले संचार रिक्तता का पता चल जाता है इस प्रकार के दो पैमाने प्रचलित है।
1 बोगार्डस का पैमाना
2 मीडियामितीय पैमाना
3 तीव्रता मापक यंत्र- व्यक्तिओं की रूचियों, अभिरूचियों, प्रवृत्तियों, मनावृत्तियों, मनाभावों आदि की तीव्रता और गहनता को मापने के लिए इन पैमानों का प्रयोग किया जाता है।
4 पदसूचक पैमाने - भिन्न- भिन्न पदों को तुलनाक्रम में रखकर जो अनुमापन पैमाना बनाया जाता है उसे की पदसूचक पैमाना कहते है। इन पैमाने  को निम्नलिखित प्रणालियों द्वारा निर्मित किया जाता है।
युग्म तुलना
हॉरोविज प्रणाली
थर्सटन प्रणाली
आंतरिक स्थिरता मापक पैमाने
मीडिया निर्देशांक
मनोवृत्तियों के माप की प्रणालियां
मीडिया संचार या समाज से जुड़े व्यक्ति अथवा समूह की मनावृत्ति दो प्रकार से मापी जा सकती है।
1 अभिमत सर्वेक्षण- व्यक्ति अथवा समूह की मनावृत्तियों के संदर्भ में उपयुक्त पैमाने द्वारा माप की सुविधा न होने के कारण प्रायः उनकी मौखिक राय के द्वारा ही उनकी प्रवृत्तियों का अनुमान किया जाता है। जब तक वास्तविक घटना न घटित हो तब तक शारीरिक व्यवहार संभव नही होता है और उसके बिना अनुमापन भी संभव नहीं होता । अतः यह कहा जा सकता है, कि व्यक्ति अथवा समूह की मनोवृत्ति का अनुमान उनके द्वारा मतानुसार ही किया जाएगा।
2 अनुमापन प्रणाली - व्यक्ति या समूह की मनावृत्ति उनके व्यवहार से परिलक्षित होती है। शरीर की भाषा से ही व्यक्ति की वास्तविक मनोवृत्ति की अभिव्यक्ति होती है। वास्तविक व्यवहार को मापने से ही मनावृत्ति का वास्तविक परिचय प्राप्त हो सकता है। मौखिक संचार के द्वारा व्यक्ति प्रायः अपने वास्तविक स्वरूप को प्रकट नहीं करता । अतः शरीर भाषा की माप ही मनोवृत्ति को समझने की सर्वश्रेष्ठ प्रणाली है।
1 अंक पैमाना - मीडिया या संचार शोध के लिए इसे सर्वाधिक सरल पैमाना माना जाता है। इसके माध्यम से व्यक्ति और समूह के व्यवहार का अनुमापन बहुत हद तक संभव है। वास्तव में अंक पैमाना के तहत मीडिया या संचार से संबंधित किसी भी विषय पर व्यक्ति और समूह की मनोवृत्ति जानने के लिए कुछ शब्द या स्थितियां लिख दी जाती है। इनमें से कुछ शब्द विषय का विरोध प्रकट करने वाले होते है। तथा कुछ उसके समर्थन का आभास देते है। उत्तरदाता जिन शब्दो को पसंद करता है उसके सामने सही और नापसंद वाले शब्दों को वहां से हटा देता है। हर सहमति के चिन्ह को 1 अंक दिया जाता है। इस प्रकार विषय के प्रति व्यक्ति की मनोवृत्ति की सीमा का अनुमान प्राप्तांको  के आधार पर किया जाता है। कभी- कभी परस्पर विरोधी तथा परस्पर सहमतिपूर्ण साथ साथ रखें जाते है। ऐसा इसलिए ताकि एक ही समय दोनो का उचित भार समझकर सूचनादाता मत प्रकट कर सके।
2 तीव्रता मापक पैमाना- यह पैमाना मनोवृत्ति मापने की एक अत्यत ही महत्वपूर्ण अनुमापन प्रणाली है। अर्थात इन पैमानों का उपयोग रूचियों और मान्यताओं की गहनता को मापने के लिए किया जाता है। व्यक्ति विषय के प्रति पूर्ण सहमत, थोड़ा बहुत सहमत, कम सहमत या असहमत हो सकता हैं। वह उदासीन और तटस्थ भी हो सकता है। व्यक्ति की मनोवृत्ति जानने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इन सभी सीमाओं का ज्ञान प्राप्त किया जाए। इसे अलग अलग शब्दों के द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। यह तीव्रता जितने शब्दों से प्रकट की जाती है। उतने ही खंड पैमाने बन जाते हैं। यहां पांच खंडो के पैमाने का उदाहरण किया जा रहा है।
1 पूर्णतः पंसद 2 पसंद 3 अनिश्चित 4 नापसंद 5 पूर्णतः नापसंद ।
यहां तीव्रता मापने के लिए सात खंडों के भी पैमाने बनाए जा सकते हैं इस पैमाने के मध्य की स्थिति को शून्य का भार प्रदान किया जाता है। इसके दोनो ओर 1 2 3 आदि शब्दों का प्रयोग होता है। ये अंक धन अथवा ऋण में प्रदान किए जाते है। तीव्रता मापक पैमाने दो प्रकार के होते है। एक सम विस्तार और एक असम विस्तार पैमाना। उपरोक्त पांच खंडों वाला पैमाना समय विस्तार पैमाना है क्योंकि इसमें भिन्न भिन्न खंडों का विस्तार समान है तथा तटस्थ बिंदु का अंक शून्य है । असमान विस्तार वाले पैमाने में भार एक क्रमानुसार होता है, जिसमें माप शून्य से आरंभ होकर आगे बढ़ती जाती है। यहा कोई जरूरी नहीं कि दोनों खंडों के बीच का विस्तार समान हो । इन दोनेां प्रकार के पैमानों को दो विद्वानों ने अलग अलग तरीके से वर्णित किया है।
1 थर्सटन का समय विस्तार पैमाना-
 यह पैमाना सबसे पहले एल एल थर्सटन द्वारा किसी समूह की राय जानने के लिए किया गया था। यह पैमाना आवृत्ति बंटन के रूप में होता है। इसकी आधार रेखा प्रवृत्तियो के पूर्ण विस्तार को समान खंडों में प्रकट करती है। सम विस्तार प्रणाली में इसके एक छोर पर धनात्मक अधिकतम भार बिंदु रहता है। जबकि दूसरे छोर पर ऋणात्मक अधिकतम भार बिंदु रहता है। यहां शून्य भार मध्य बिंदु पर रहता है।
2 लाइकर्ट का पैमाना
यह पैमाना भी थर्सटन के पैमाने की तरह ही है, किन्तु उससे अधिक सरल और सुबोध है। लाइकर्ट के तीव्रता मापक पैमाने को तीव्रताओं के योग का पैमाना भी कहा जाता है।
इस प्रणाली में अंक प्रदान करने की एक अन्य विधि को लगाया जाता है जिसे सिगमा विधि कहा जाता है। इसका उपयोग एक गणितीय तालिका के माध्यम से किया जाता है। भिन्न भिन्न विवरणों को अनेक प्रकार के व्यक्तिाओं में बांटकर उनमें पांच खंडों में से किसी एक खंड पर निशान लगाने को कहा जाता है। बाद में हर एक खंड का योग प्रतिशत में निकाल लिया जाता है। हर प्रतिशत का सिगमा मूल्य भी निकाल लिया जाता है।
पदसूचक पैमाना- यह अनुमापन प्रणाली का एक अपरिहार्य पैमाना है। यह तीव्रता मापन पैमाने के सदृश्य होता है। इसमें किसी विशेष तत्व का सभी क्रमों में स्थान निर्धारित किया जाता है। इस पैमाने के जो दो प्रमुख पैमाने है वे इस प्रकार है।
1 तुलनात्मक युग्म - इस विधि के अन्तर्गत व्यवसायों के जोड़े लिखकर सूचनादाता को दिए जाते है। हर जोड़े में से एक पर सहमति का निशान लगवाया जाता है। प्रत्येक व्यवसाय को मिले अंको या प्राथमिकताओं का योग निकाल लिया जाता है। इन सभी के माध्य को पैमाने का मूल्य समझा जाता है।
3 हॉरोविज प्रणाली - हॉरोविज ने जातीय पक्षपात का अध्ययन करने के लिए 12 चित्रों का चयन किया। इसमें से 8 नीग्रो और 4 गोरे बच्चों के थे। ये चित्र स्कूली बच्चों को दिये गये । इन बच्चों को चित्रों को प्राथमिकता के आधार पर उपर से नीचे क्रमानुसार लगाने को कहा गया । उपर से नीचे चित्रों को क्रम से 1 2 3 4 5 आदि अंक दिए गए । हॉरोविज ने इन स्कूली बच्चों में बालकों को भिन्न भिन्न स्थितियों में उन्ही चित्रों में से साथी चुनने का कहा। इस प्रकार प्राथमिकता के प्रतिशत के आधार पर पक्ष या विपक्ष का फैसला लिया गया ।
4 संचार रिक्तता माप पैमाना- इर समाज या समुदाय में  संचार रिक्तता के कारण वर्ग विद्वेष की भावना किसी न किसी रूप में पाई जाती है। प्रायः व्यक्ति अतीत के अनुभवों और आस पास के पर्यावरण से प्रभावित होकर किसी वर्ग के प्रति सकारात्मक नजरिया रखता है। दोनो वर्गो के प्रति द्वेष और निकटता की भावना भी अलग अलग मात्रा में होती है। इस प्रकार की संचार रिक्तता को मापने के लिए संचार रिक्तता पैमाना या सामाजिक दूरी पैमाना का प्रयोग किया जाता है। संचार रिक्तता या सामाजिक दूरी मापने के लिए निम्नलिखित दो प्रकार के पैमाने अधिक प्रचलित है।
1 बोगार्डस का पैमाना- बोगार्डस ने संचार रिक्तता या सामाजिक दूरी को इंगित करने वाले भिन्न- भिन्न संबंधों को चयन किया । इन सभी संबंधों को सात ऐसी श्रेणियों में विभाजित किया गया जो बढ़ती हुई संचार रिक्तता या समाजिक दूरी प्रकट करती थी। यह काम सौ जजों से कराया गया। बाद में ये अनुसूचियों 1725 व्यक्तिओं को दी गयीं। इनमें दक्षिण की ओर प्रजातियों  के नाम लिखे गये। उत्तर की ओर संबंधों या दूरियों की श्रेणियां रखी गई । जैसे व्यवसाय साथी, जीवन साथी, क्लब, साथी आदि बनाने की स्वीकृति। इन सभी व्यक्तिओं को श्रेणियों के सामने चिन्ह लगाने का निर्देश दिया गया । हर श्रेणी के आधार पर प्रजातियों के प्रति मनोवृत्तियों का योग निकालकर प्रतिशत में परिवर्तित किया गया। इस प्रकार भिन्न भिन्न के प्रति संचार रिक्तता या सामाजिक दूरी का औसत निकाला गया । लेकिन इस विधि को कम विश्वसनीय समझा जाता है।
मीडियामितीय पैमाना- इस विधि का प्रयोग भी प्रत्यक्ष- परोक्ष रूप से किया जाने लगा है। यह पैमाना संस्थागत अथवा सामुदायिक अथवा सामूहिक मनोवृत्तियों को मापने में उपयोग किया जाता है। समूह में पारस्परिक संचार एवं संबंधों की माप में यह पैमाना अधिक प्रासंगिक, लाभकारी, उपयोगी और सहायक साबित होता है।
मीडिया या संचार शोध में सामुदायिक, संस्थागत व्यवहार का निम्न लिखित प्रणालियों द्वारा मापा जा सकता है।
1 मीडियामितीय पैमाना - इस प्रणाली की निम्न लिखित विशेषता होती है।
अ मीडियामितीय एक अनुमापन विधि है, जिसके द्वारा सामूहिक या सामुदायिक स्वीकृति अथवा अस्वीकृति प्रेम अथवा घृणा की सीमा माप ली जाती है।
ब  यह सामुदायिक, संस्थागत, या सामूहिक संबंधों, मीडियाई या संचारिक संरचना तथा स्थिति के अध्ययन से संबंधित है।
स इसके द्वारा सामुदायिक,संस्थागत, सामाजिक तथा समूह सांचारिक व्यवहार की प्रस्तुति रेखाचित्रों अथवा सरल बिंदु रेखाओं द्वारा की जाती है।
इस पैमाने के निर्माण में संस्था का चुनाव माप के पहलू संबंधित तथ्यों का चुनाव एवं भार प्रदानीकरण आदि जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का अपनाया जाता है। एक अच्छी मीडियामितीय पैमाने में विश्वसनीयता, वैधता, सरलता, व्यापकता, व्यावहारिकता, आदर्शानुकूलता, और उचित भार की मौजुदगी रहती है।
2 मीडिया की बिंदु रेखीय विधि- मीडिया का बिंदु रेखीय या ग्राफ द्वारा चित्रण पारस्परिक आकर्षण अथवा विकर्षण को प्रकट करने का सरल मीडियामितीय साधन है।
3 मीडिया निर्देशांक- जब मीडिया या संचार से संबंधित एक से अधिक सम्मिलित तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन करना होता है, तो मीडिया निर्देशांको का प्रयोग किया जाता है। सांचरिक अथवा संस्थागत व्यवहार को मापने के लिए मीडियामितीय पैमानों का अधिक परिमार्जित और परिष्कृत रूप निर्देशांक है। इसके द्वारा मीडिया या संचार से संबंधित तथ्यों की माप की इकाई में की जा सकती है तथा एक ही दृष्टि में उनके बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।
अनिल अत्री ........