Monday, September 14, 2009

ये इलाका हें उत्तरी दिल्ली के बुरारी का ...

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एंकर - दिल्ली में यमुना से बाड का प्रकोप किसानो व निचले इलाकों में रहने वाले लोगो पर लगातार जारी हें ... निचले इलाको के लोग सरकार द्बारा विस्थापित कर दिए गए हें .. किसानो की गाडी मेहनत व पूजी लगाई गई फसल बर्बाद हो गई ..... कुछ किसान अपना खेत व पशीने से शिची गई फसल छोड़ने को तेयार नही थे इसी के चलते बाड का पानी बढ जाने से वे पानी के बिच फस गए .... आखिरकार कोई उपाय न होने पर लोगो ने प्रशाशन को सूचित किया .. बाड नियन्त्रण विभाग के अदिकारी मोके पर पहुचे .... बोट्स का इंतजामात किया गया व फायर के जवानो की सहायता से अब तक पैतीस लोगो को निकाला जा चुका हें .. बाकी किस्तियों द्वारा तलाश जारी हें ...
वी ओ १ ..
ये इलाका हें उत्तरी दिल्ली के बुरारी का ... यहा यमुना किनारे हें ये गाव के लोगो के खेत .... पर ये क्ल्हेत अब हो गए हें जल मग्न दिल्ली में यमुना से बाड का प्रकोप किसानो व निचले इलाकों में रहने वाले लोगो पर लगातार जारी हें ... निचले इलाको के लोग सरकार द्बारा विस्थापित कर दिए गए हें .. किसानो की गाडी मेहनत व पूजी लगाई गई फसल बर्बाद हो गई ..... कुछ किसान अपना खेत व पशीने से शिची गई फसल छोड़ने को तेयार नही थे इसी के चलते बाड का पानी बढ जाने से वे पानी के बिच फस गए .... आखिरकार कोई उपाय न होने पर लोगो ने प्रशाशन को सूचित किया .. बाड नियन्त्रण विभाग के अदिकारी मोके पर पहुचे .... बोट्स का इंतजामात किया गया व फायर के जवानो की सहायता से अब तक पैतीस लोगो को निकाला जा चुका हें .. बाकी किस्तियों द्वारा तलाश जारी हें ...
बाईट - विजय भारद्वाज ( एस डी एम् उत्तरी जिला )बाईट टेक्स्ट ( पेतिश चालीश की आशका थी ..सभी को निकाल लिया गया हें ... इनका खाने व रहने का इंतजामात भी किया गया हें .. बाकी सर्च अभियान जारी हें .... तिन चार बोट लगाई गई हें ....)
वी ओ २
ये गरीब अपनी फसल से बेहद आस लगाए हुए थे तो केसे इन्हें छोड़ सकते थे .. पर ये इस बात से अनजान हें की इस बाड हें तदा सा पानी और बढ जाने पर इनकी जान भी जा सकती हें .. यदि प्रशाशन नही पहुचता तो ये लोग बआर नही आ सकते थे ..और इनकी मोत भी हो सकती थी .. पर प्रशाशन मोटर वाली बोटों के साथ इन लोग की जान बचाने में जूता हें .. पर ये लोग इतने दुखी हें की कुछ बोल भी नही पा रहे हें सिर्फ
इतना बोल रहे हें की हम फस गए थे ...
बाईट - जोकू ( बचाया गया शख्श )बाईट टेक्स्ट ( क्या करे फस गे थे कर भी क्या सकते थे .. )
दरोगा ( बचाया गया शख्श ) बाईट टेक्स्ट ( यहा तिन साल से रह रहे हें .... दो से ढाई लाख का हमारा नुकशान हो गया ..... हमारा कुछ भी नही बचा )
वी ओ ३
अब लोगो को भी समझना होगा की खेती व घर से हमारी जन ज्यादा कीमती हें और परशाष्ण के साथ मदद करते हुए सुरक्षित स्थानों पर चले जाए .........

1 comment:

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