Sunday, September 13, 2009

डूबता लोहे का पूल सभी चैनल दिखा रहे हें ..

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बाड बाड पूरी मीडिया चिल्ला रही हें .. सभी आई एस बी टी के पास फ्लाई ओवर पर खड़े होकर रिपोर्टिंग कर रहे हें .... यमुना बाजार व डूबता लोहे का पूल सभी चैनल दिखा रहे हें .. पर बर्बाद होते अन्न दाता को कोई चैनल नही दिखा रहा हें .... जो देश के लिए अन्न पैदा करता हें मीडिया उसका जिक्र ही नही कर रही हें .. या ये मीडिया की टी आर पी वाली मजबूरी हें .... की कोई शहरी किसान की खबर नही देखेगा व पडेगा .. यदि देखायेगे तो कोई तो देखेगे पर टी आर पी में थोडा बहुत अंतर आ सकता हें ..पर वो खबर धरातल से जूडी होगी .....
इसी से मेरी नजर तो उन गरीब अन्न दाताओं पर थी जो मीडिया ही नही सरकार की भी उपेक्षा के शिकार हें .. मेने तो अपने चेनल पर लोहे का पूल बंद होने की खबर न भेजकर अन्नदाता , निर्माता , भू स्वामी , हलधर की ये व्यथा भेजी
महलो को बनाता हें ...
झोपडी में रहता हें ...
कोदई खाता हें ...
गेहू खिलाता हें ....
कजल पूता खानों में काम करता हें ..
पर चमाचम विमानों को उडाता हें .....
उस के भले की खबर बनाने में मुझे शकुन आता हें ...
अनिल अत्तरी

दिल्ली में यमुना में आया उफान किसानो के लिए भी मुसीबत लेकर आया हें पहले सूखे की मार अब यमुना के पानी ने इनकी सारी फसल तबाह कर दी किसानो की सारी मेहनत व खर्च बेकार चला गया ... किसान पानी कच्ची फसल ही काटकर भाग रहे हें ...
आखिर ये वही यमुना हें जो इन्हें बनाती भी हें बिगाड़ती भी हें कभी ये यमुना देवी इनके लिए अभिशाप बनकर आती हें तो कभी धन धान्य देकर ये मातिर रूपा हो जाती हें ..... लेकिन लगातार दो साल से यह इनके लिए अभिशाप ही बनी हुई हें
दिल्ली में यमुना में आया उफान किसानो के लिए भी मुसीबत लेकर आया हें पहले सूखे की मार अब यमुना के पानी ने इनकी सारी फसल तबाह कर दी किसानो की सारी मेहनत व खर्च बेकार चला गया ... ये इलाका हें बुरारी व नथुपूरा , जगतपुर का यहा के किसान बेहाल हें यमुना किनारे इनकी फसल तबाह हो गई और जो बच गई वह आज रात या सुबह तक तबाह हो जाएगी .... यमुना किनारे बसे गॉवो के लोग खेती बाड़ी से ही अपना गुजारा करते हें .... इन दिनों धान , ज्वार . मूली . गोबी जेसी फसले व सब्जिया उगा रखी थी ... जेसे ही दिल्ली सरकार बाड के लिए सूचना दे रही हें ये लोग बेचेन हो गए इनकी फसल कच्ची हें तो ये कर भी क्या सकते हें .... ये देखिये ये लोग जल्दबाजी में कच्ची फसल ही उखाड़ रहे हें ताकि कुछ तो मिले पर इन्हें शिकायत सरकार से हें की इनकी फसल कई सालो से ऐसे ही खराब हो रही हें इनका पूरा खर्च खाद बिज किट नाशक जुताई आदि को मिलाकर लाखो में बन जाता हें पर फसल तबाह होने पर सरकार इन्हें एक पैसा भी मुवाजा नही देती ये किसानो के साथ ना इंसाफी हें ..........
अब इस गरीब किसान सुरेंदर का हाल देखिये इसकी पूरी फसल पानी में डूब गई पशुओं के लिए चारा भी नही बचा ... अब ये अपने पशुओ के साथ खेत को दूर से देखता हुआ इधर उधर पशु घुमा रहा हें ..... अब ये इस महगाई में चारा खरीदने के काबिल भी नही हें
अब प्रश्न ये भी उटता हें की क्या दिल्ली सरकार को सिर्फ व्यापारी वर्ग ही दिखाई देता हें किसानो की कोई परवाह नही .. क्यों नही हर साल तबाह होने वाले किसानो के लिए भी कोई पुख्ता इंतजामात नही किए गए
अब ये अपनी तबाही का नजारा खुद अपनी आखो से यहा बढ़ पर खडे होकर देख रहे हें .

3 comments:

  1. खाक अच्छा है झूठी तारीफ करवाता है..

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  2. अबे ये क्या है कमेंट देने वाला ही क्या लिख रहा है

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