Monday, March 29, 2010

जब बच्चे को भरपेट दूध व सब्जी खाना नही मिलेगा तो वह कुपोषण का शिकार होगा ही ....

डॉक्टर मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री ही नही जाने माने अर्थ शास्त्री भी है बाजूद इसके केंद्र सरकार महेगाई को काबू करने मई नाकाम साबित हो रही है कहते हैं कि सुधार सरकारे नहीं समाज करता है। लेकिन आज हम सब सरकारों के मुँह की ओर ताक रहे हैं। सरकारों को वे लोग संचालित कर रहे हैं जिनके पास शक्‍कर की ‘मिले’ हैं, हजारों बीघा जमीन हैं। क्‍या ऐसी सरकार और ऐसे मंत्री जमाखोरों को सबक सिखा सकते हैं?
आज दिल्ली मै गरीब आदमी का गुजारा नामुमकिन है वो बच्चों की पढाई तो दूर उनको भरपेट खाना भी नही दे सकता ... आज दूध की कीमते आसमान छू रही है गरीब मजदुर दिहाड़ीदार मजदुर तो दूर की बात एक मध्यम वर्गीय इंसान भी अपने बच्चों को अच्छा खाना व कपडे देने मै आज नाकाम है ..... आटा ,दाल , दूध , सब्जी , फल , कपडा , फीस , किराया सब कुछ बढ गया .... पेट्रोल डीजल के दाम बढ गये .. डीजल के दाम बड़े है तो ट्रांसपोर्ट का किराया बड़ना लाजमी है और यदि ये किराया भाडा बड़ा तो सभी वस्तुए और महेगी अपने आप हो जायेगी .... अब गरीब इंसान एक सो से दो सो रूपये की दिहाड़ी करने वाला मजदूर एक चार से पाच हजार की नोकरी करने वाला इंसान दिल्ली मै केसे रह पायेगा .. उसे दिल्ली छोडनी ही पड़ेगी या बच्चों के साथ खुदकुशी जेसा कदम उठाना पडेगा ...देश की राजधानी मै भी ऐसे केस आ रहे है की लोग आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या कर रहे है कभी व्यापारी तो कभी पूरे का पूरा परिवार ये पूरे देश के ऊपर एक कलंक है ........ सरकार के लिए शर्म की बात है .. पर गरीबो की ये दुर्दशा सरकार को दिखाई नही देती .. सरकार को तो सिर्फ बड़े बड़े व्यापारियों के हित ही दिखाई देते है ...........सरकार ने पहले थाली से रोटी छिनी अब बच्चों के मुह से दूध भी छीन लिया .. दूध का रेट हो गया तिस रूपये लीटर अब गरीब अपने बच्चों को केसे दुश पिला सकता है उसे आटा सब्जी भी चाहिए .. इससे साफ है इन गरीबों के बच्चे कुपोषण के शिकार होगे ... भारत मै कुपोषण के शिकार बच्चों की तादाद विशव की तुलना मै ज्यादा है और दिन परतिदिन बढ रही है इसका कारण मै इस महेगाई को भी मानता हूँ जब बच्चे को भरपेट दूध व सब्जी खाना नही मिलेगा तो वह कुपोषण का शिकार होगा ही ....लेकिन यदि एक गरीब के दो बच्चे है दो खुद पति पत्नी है और तनख्वाह या कमाई चार या तिन हजार है तो वो सो रूपये से ज्यादा हर रोज केसे खर्च कर सकता है ........सो रूपये मै उसे आटा , पानी , सब्जी , साबुन घी तेल दूध फीस किराया सब निपटना होगा ... साफ है गरीब लोग दिल्ली छोड़ों ..यहा पेसे वाले रहेगे .. मंत्रियों के लोग रहेगे .. गरीब लोग सड़कों पर भीड़ करते है मंत्रियों को उनके रिश्तेदारों को सड़कों पर जाम मिल जाता है इअलिये कुछ ऐसा किया जाए की गरीब यहाँ से भाग जाए .. लगता है इसी मनसा से काम हो रहा है देश की राजधानी मै ... कोम्वेल्थ का बहाना मिल गया दिल्ली को साफ चमकती दिखायेगे पर इन गरीब व भूखे बच्चों को कहा छिपायेगे /////// लगता है दिल्ली सरकार चलो गाव की और नारे को अमली जामा पहना रही है ...........

Anil Attri Delhi

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